जिनके जिम्मे यमुना की सफाई, वही कर रहे उसे गंदा, दिल्ली के 7 एसटीपी मानकों पर फेल

दिल्ली के 37 एसटीपी में से 7 मानकों पर फेल पाए गए हैं, जहां ट्रीट पानी में फीकल कोलीफॉर्म तय सीमा से कई गुना ज्यादा मिला। इससे यमुना प्रदूषण बढ़ने की चिंता बढ़ गई है, हालांकि अपग्रेड का काम जारी है।

नई दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की ताजा गुणवत्ता रिपोर्ट में गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार सात एसटीपी निर्धारित मानकों पर पूरी तरह खरे नहीं उतर पाए हैं, जहां ट्रीट किए गए पानी में फीकल कोलीफॉर्म की मात्रा तय सीमा से कई गुना अधिक पाई गई है। जानकारी के मुताबिक, पिछले कई महीनों से इन एसटीपी से निकलने वाले पानी में फीकल कोलीफॉर्म का स्तर 230 एमपीएन/100 एमएल की मानक सीमा से काफी ऊपर बना हुआ है। हालांकि जनवरी और फरवरी की तुलना में इस बार इसमें कुछ कमी दर्ज की गई है। ट्रीट किया गया यह पानी नालों के माध्यम से यमुना नदी में पहुंचता है, जिससे नदी के प्रदूषण में और इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार कुल 37 एसटीपी में से करीब 19 प्रतिशत प्लांट ऐसे हैं, जहां ट्रीट किए गए पानी की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है। महरौली स्थित 15 एमजीडी क्षमता वाले एसटीपी में फीकल कोलीफॉर्म की मात्रा 28,000 एमपीएन/100 एमएल दर्ज की गई, जो निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक है।
इसी तरह घिटोरनी एसटीपी में यह स्तर 17,000 एमपीएन/100 एमएल, वसंत कुंज-1 में 11,000, वसंत कुंज-2 में 8,000 और यमुना विहार फेज-3 एसटीपी में 9,500 एमपीएन/100 एमएल पाया गया। इसके अलावा यमुना विहार फेज-1 और दिल्ली गेट (ओल्ड) एसटीपी में भी फीकल कोलीफॉर्म की मात्रा सामान्य से अधिक दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में दूषित पानी यमुना में जाने से नदी का प्रदूषण स्तर और गंभीर हो सकता है। वहीं, जल बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार जिन एसटीपी में यह समस्या सामने आई है, वे काफी पुराने और तकनीकी रूप से पिछड़े हो चुके हैं।
अधिकारियों ने बताया कि इन सभी एसटीपी को अपग्रेड करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। उन्नयन कार्य पूरा होने के बाद ट्रीट किए गए पानी में फीकल कोलीफॉर्म का स्तर निर्धारित मानक 230 एमपीएन/100 एमएल से भी नीचे लाया जा सकेगा। फिलहाल स्थिति पर नजर रखी जा रही है और सुधार के प्रयास जारी हैं।

Related Articles

Back to top button