दिल्ली के कारोबारी से 10 करोड़ की मांगी रंगदारी, स्पेन से जुड़ा कनेक्शन, पंजाब पुलिस का पूर्व एएसआई भी शामिल
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में धमकी भरे संदेशों और वॉयस नोट्स के तार विदेश में बैठे एक संदिग्ध से जुड़े पाए गए हैं।

नई दिल्ली। डिफेंस इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर से 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को जांच के दौरान कई अहम सुराग मिले हैं। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि धमकी भरे संदेश और व्हॉट्सऐप वॉयस नोट भेजने की साजिश के तार विदेश में बैठे ‘मन्नी’ नामक व्यक्ति से जुड़े हुए हैं। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में जुटी हैं।
जांच के दौरान यह भी पता चला कि पीड़ित के मन में अलगाववादी संगठनों और कुख्यात गैंगस्टरों का भय पैदा कर उससे रकम वसूलने की कोशिश की गई। इस मामले में क्राइम ब्रांच ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें पंजाब के तरनतारन निवासी गुरपिंदर सिंह उर्फ प्रिंस, शमशेर सिंह उर्फ सैम और अमृतसर निवासी जसवंत सिंह शामिल हैं। इनमें जसवंत सिंह की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वह पंजाब पुलिस में एएसआई रह चुका है, लेकिन वर्ष 2006 में उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। उसके खिलाफ पंजाब में पहले से दो आपराधिक मामले दर्ज हैं।
स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस हरगोबिंदर सिंह धालीवाल के अनुसार कारोबारी साहिल लूथरा को अगस्त और सितंबर 2025 के दौरान कई धमकी भरे कॉल और संदेश प्राप्त हुए थे। इसके बाद 4 जून को एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से व्हॉट्सऐप वॉयस नोट भेजकर 10 करोड़ रुपये की मांग की गई और रकम नहीं देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई।
10 जून को यह मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा गया, जिसके बाद डीसीपी क्राइम संजीव कुमार यादव, एसीपी संजय कुमार नागपाल, इंस्पेक्टर मान सिंह और इंस्पेक्टर सुंदर गौतम की निगरानी में एंटी रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल ने जांच को आगे बढ़ाया और आरोपियों तक पहुंच बनाई। पूछताछ के दौरान गुरपिंदर और शमशेर ने स्वीकार किया कि उन्होंने जसवंत सिंह के निर्देश पर धमकी भरे वॉयस नोट भेजे थे। साथ ही यह भी सामने आया कि शुरुआती कुछ संदेश स्पेन में मौजूद ‘मन्नी’ के जरिए भेजे गए थे।




