धर्म और विज्ञान का अनूठा संगम: आशुतोष राणा के साथ ‘दुर्लभ दर्शन’ लाएगा 6D आध्यात्मिक अनुभव

एंटरटेनमेंट डेस्क/नई दिल्ली। देश के प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन अब एक ही स्थान पर बैठकर सजीव अनुभव के साथ किए जा सकेंगे। ‘दुर्लभ दर्शन’ द्वारा विकसित विशेष 6D वर्चुअल रियलिटी (VR) तकनीक के माध्यम से श्रद्धालु न केवल मंदिरों के दृश्य देख पाएंगे, बल्कि वहां के वातावरण—जल, वायु और सुगंध—की वास्तविक अनुभूति भी कर सकेंगे।
प्रख्यात अभिनेता आशुतोष राणा इस पहल से बतौर ब्रांड एम्बेसडर और मेंटर जुड़े हैं। दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “धर्म का अपना विज्ञान होता है और विज्ञान का अपना धर्म, लेकिन जहां दोनों मिलते हैं, वही दुर्लभ दर्शन है।” उन्होंने बताया कि यह विश्व का पहला 6D आध्यात्मिक अनुभव होगा, जिसमें दर्शक VR तकनीक के जरिए कहीं से भी मंदिरों के दर्शन कर सकेंगे और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाओं, अनुष्ठानों और आरती की जानकारी सरल भाषा में प्राप्त कर पाएंगे।
इस श्रृंखला की शुरुआत 1 जुलाई से “श्रीराम की अयोध्या” और “उज्जयिनी के महाकाल” जैसे अनुभवों से होगी, जिनमें आशुतोष राणा प्रस्तोता के रूप में दर्शकों को मंदिरों का महत्व और उनसे जुड़ी कहानियां बताएंगे। इन आध्यात्मिक कथाओं का लेखन साहित्यकार आलोक श्रीवास्तव ने किया है।
दुर्लभ दर्शन और TechXR Innovations के संस्थापक, IIT कानपुर के पूर्व छात्र और पूर्व IRS अधिकारी प्रशांत मिश्रा ने बताया कि कंपनी देशभर में 100 से अधिक 6D इमर्सिव अनुभव केंद्र स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। फिलहाल देश के 11 प्रमुख मंदिरों के अनुभव उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन केंद्रों में श्रद्धालु 10 से 15 मिनट तक ऐसा अनुभव करेंगे मानो वे स्वयं मंदिर के गर्भगृह में उपस्थित हों।
कंपनी के अनुसार, मोबाइल VR किट के माध्यम से घर बैठे भी 60 से अधिक तीर्थस्थलों का अनुभव किया जा सकता है। आगामी चरण में चारधाम यात्रा, द्वादश ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ, जगन्नाथ रथ यात्रा, दक्षिण भारत के प्रमुख मंदिरों सहित कई अन्य धार्मिक यात्राओं को भी इस तकनीक से जोड़ा जाएगा।
दुर्लभ दर्शन की 6D तकनीक पूरी तरह ‘मेड इन इंडिया’ है और इसके पेटेंट के लिए आवेदन किया जा चुका है। यह तकनीक VR हेडसेट के साथ जुड़कर समयानुसार वातावरणीय अनुभव उत्पन्न करती है, जिससे दर्शन और अधिक सजीव बन जाते हैं।
देशभर के कई प्रमुख मंदिरों जैसे काशी विश्वनाथ, महाकालेश्वर, वैष्णो देवी, हरिद्वार और अयोध्या में इसके केंद्र संचालित हो रहे हैं। कंपनी का उद्देश्य हर श्रद्धालु तक “मन भर दर्शन” पहुंचाना है।
गौरतलब है कि इस पहल के पीछे संस्थापक प्रशांत मिश्रा की प्रेरक कहानी भी जुड़ी है, जिन्होंने 15 वर्षों की IRS सेवा छोड़कर इस तकनीकी स्टार्टअप की स्थापना की। आज उनकी कंपनी देशभर में 250 से अधिक युवाओं को रोजगार प्रदान कर रही है।
धर्म और आधुनिक तकनीक के इस संगम को आध्यात्मिक अनुभव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो भविष्य में दर्शन की परंपरा को एक नया आयाम दे सकता है।

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