किरकरी के बाद टूटी दिल्ली एमसीडी की नींद, तबादले के आदेश रद; मृत इंजीनियरों का कर दिया था ट्रांसफर
राजधानी दिल्ली में एमसीडी ने मृत और निलंबित इंजीनियरों के तबादले के आदेश रद कर दिए हैं। यह फैसला दैनिक जागरण द्वारा मामला उजागर करने और नेता प्रतिपक्ष की आलोचना के बाद लिया गया।

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में एमसीडी द्वारा अपने मृत और निलंबित चल रहे इंजीनियरों के तबादले पर एमसीडी की नींद टूट गई है। एमसीडी ने शुक्रवार को हुए सभी तबादले के आदेश रद कर दिए हैं। जहां पहले एमसीडी ने संशोधित आदेश निकालकर अपनी गलती सुधारने की कोशिश की थी लेकिन, उसमें दो मृत इंजीनियरों में से एक ही इंजीनियर का नाम हटाया था।
वहीं, निलंबित चल रहे इंजीनियर का नाम नहीं हटाया था। मामला बिगड़ता देख एमसीडी ने अब आदेश पूरी तरह ही रद कर दिए हैं। यानी जिस सूची में 12 इंजीनियरों के तबादले हुए थे, वह सूची ही रद हो गई है। इससे कई इंजीनियरों का फायदा हो गया, क्योंकि कुछ लोगों का जोन बदला गया था तो कुछ लोगों को बिल्डिंग विभाग से हटाकर मेंटेनेस में लगाया गया था।
मीडिया ने इंजीनियरिंग विभाग द्वारा किए गए तबादले में दो मृत इंजीनियर प्रतीक और अपूर्व भटनागर और एक निलंबित चल रहे गौरव गर्ग का मुद्दा उठाया था। मामले में हुई किरकिरी के बाद अब निगम ने तबादले के आदेश रद कर अपनी गलती को सुधारने की कोशिश की है। इस मामले में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने विभागीय गलती पर अधिकारियों पर सवाल उठाए हैं। नारंग ने कहा कि कई माह पहले जिन इंजीनियरों का निधन हो गया था और एक का निलंबन हो चुका है उसका ट्रांसफर करना हैरान करने वाला है।
उन्होंने इस ट्रांसफर आदेश की तत्काल जांच की मांग उठाते हुए कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि मृतक कर्मचारियों का नाम सूची में किस अधिकारी ने शामिल किया। जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए डिजिटल सत्यापन प्रणाली लागू की जाए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या भाजपा शासित एमसीडी बिना किसी सत्यापन के फाइलें चला रही है और अतिरिक्त आयुक्त भी हस्ताक्षर कर लदे रहे हैं क्या उन्हें भी अपने विभाग के कर्मचारियों की स्थिति की जानकारी नहीं है। जब मृत, निलंबित और सेवा में न रहने वाले कर्मचारियों के तबादले किए जा रहे हों, तब समझा जा सकता है कि भाजपा के राज में प्रशासनिक व्यवस्था किस स्तर पर पहुंच चुकी है।




