जनगणना में शामिल न होना पड़ेगा भारी! जुर्माने के साथ सजा का भी प्रावधान
देश में जनगणना की शुरुआत हो चुकी है। बार-बार समझाने के बाद भी अगर कोई जनगणना में शामिल नहीं होता है तो सेंसस एक्ट-1948 के सेक्शन-11 के तहत उस पर 1000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा तीन साल तक की सजा का प्रावधान भी है।

नेशनल डेस्क। सरकार बार-बार लोगों से जनगणना में शामिल होने की अपील कर रही है। इसके बाद भी अगर आप घर आए जनगणनाकर्मी को जनगणना में शामिल होने से बार-बार इनकार करते हैं तो जुर्माने के साथ-साथ आपको तीन साल तक की सजा हो सकती है। दिल्ली में अभी तक ऑनलाइन एन्यूमरेशन में 1.10 लाख से अधिक लोगों ने सेल्फ रजिस्ट्रेशन कराया है।
जनगणना से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कोई इसमें शामिल होने से इनकार करता है तो उसे समझाने की कोशिश करेंगे। बार-बार समझाने के बाद भी वह जनगणना में शामिल नहीं होता है तो सेंसस एक्ट-1948 के सेक्शन-11 के तहत उस पर 1000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा तीन साल तक की सजा का प्रावधान भी है।
जनगणना अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में अभी 15 मई तक ऑनलाइन सेल्फ एन्यूमरेशन (स्व-गणना) चल रही है। फिर 16 मई से घर-घर जाकर जनगणना का काम शुरू होगा। 16 मई से आप के घर जनगणनाकर्मी आएंगे तो आपको उनके पास एक आईडी कार्ड मिलेगा। उसमें एक क्यूआर कोड होगा। जिसे स्कैन करके आप उसका सत्यापन कर सकते हैं।
जनगणनाकर्मी आपके घर आएंगे तो आप से पहला सवाल पूछेंगे कि आप ने सेल्फ एन्यूमरेशन कराया है। क्या। अगर हां, तो आपको सेल्फ एन्यूमरेशन के दौरान मिला आईडी नंबर बताना होगा। अगर नहीं सभी 33 सवालों के जवाब देने होंगे, जिसमें करीब 20 मिनट का समय लगेगा।
जनगणना में सभी को शामिल होना चाहिए। जनगणना के आंकड़ों से सरकार को देश की वास्तविक स्थिति का पता चलता है। उसके आधार पर जनहित में लाभकारी नीति बनाने में मदद मिलती है। जनगणना के आंकड़ों को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाता है। सरकार व्यक्तिगत आंकड़ों को कभी भी सार्वजनिक नहीं करती है। इसलिए सभी को जनगणना में पूछे गए सवालों की सही जानकारी देनी चाहिए। अगर आप किराये के मकान में रहते हैं तो भी आप इस जनगणना में शामिल हो सकते हैं।




