साक्षी यादव ने खाली गैस सिलेंडर को चूल्‍हा बना सेंकी रोटियां, अखिलेश ने वीडियो शेयर कर लिखा- आपदा में आविष्कार!

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रयागराज की महिला साक्षी यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इसमें वह खाली सिलेंडर को चूल्‍हा बनाकर रोटी सेंकती दिखी हैं।

प्रयागराज/उत्तर प्रदेश। पिछले कुछ महीने के भीतर सरकार ने तीसरी बार घरेलू गैस के दाम बढ़ाए हैं। इससे आम जनता को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रयागराज में एक फैमिली ने गैस सिलेंडर को काटकर चूल्‍हे का शक्‍ल दे दिया है। घर की महिलाएं इस चूल्‍हे पर रोटियां सेंकती नजर आई हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इससे जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर लिखा है- आपदा में आविष्कार! महंगी हुई गैस तो जिस ‘सिलेंडर’ से चूल्हा जलता था उसे ही चूल्हा बना लिया।
इस वीडियो में प्रयागराज में रहने वालीं साक्षी यादव चूल्‍हे पर रोटी बनाती दिख रही हैं। उनका कहना है- ‘पहले जब 450 रुपये गैस सिलेंडर का दाम हुआ करता था तब कितनी हाय तौबा मचती थी। अब लगभग दाम 1 हजार रुपये हो गया है। एक मिडिल क्‍लास फैमिली के लिए बहुत दिक्‍कत हो गई है। चाहे वह राशन हो चाहे गैस हो, हर चीज महंगी हो चुकी है। महिलाओं की शौक करने की इच्‍छा खत्‍म हो चुकी है। अब हम लोग बस घर के बच्‍चों को खाना खिला लें, वही बहुत है।’
साक्षी यादव ने कहा- ‘जो गैस के दाम बढ़े हैं, उससे हमें बहुत दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा है क्‍योंकि हमारी जाइंट फैमिली है। एक सिलेंडर में तो वैसे भी हमारा काम नहीं चल पाता है। घर में ज्‍यादा लोग होने की वजह से दो सिलेंडर लग जाते हैं। बढ़ती महंगाई में हमारा बहुत पैसा खर्च हो जा रहा है। सरकार गैस आपूर्ति भी नहीं कर पा रही है। इसलिए हमने सिलेंडर को काटकर चूल्‍हा बना दिया है। भीषण गर्मी में हम लोग चूल्‍हे पर खाना बनाकर हम लोग पसीने से भीग चुके हैं।’
परिवार की एक अन्‍य महिला ने बताया- ‘हमारे पास खाली सिलेंडर है। हमें गैस नहीं मिल पाई इसलिए हमने इसे काटकर चूल्‍हा बना दिया है। एक बार गैस मिलने के 25 दिन बाद ही दोबारा बुकिंग करवा सकते हैं। हमारा परिवार बड़ा है। इतना दिन सिलेंडर ही नहीं चल पाता कि 25 दिन तक इंतजार करें। हमारा पूरे महीने का बजट बिगड़ गया है। हर चीज तो महंगी हो गई है। मेरे यहां गैस नहीं थी तो बच्‍चों को टिफिन देना मुश्किल हो गया था। बच्‍चों को टिफिन में चिप्‍स और सेब देकर भेजना पड़ा था। हमारे यहां महीने में दो सिलेंडर लगते हैं पर एक ही मिलता है। मजबूरी में हम लोगों को खाली सिलेंडर को चूल्‍हा बनाना पड़ा।’

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