समुद्र में बढ़ेगी भारत की ताकत, नेवी में शामिल होंगे 4 स्वदेशी युद्धपोत और एक सर्वे शिप

भारतीय नौसेना इस महीने अपने बेड़े में पांच स्वदेशी युद्धपोत और एक सर्वेक्षण पोत शामिल करने जा रही है। यह कदम भारत की समुद्री सुरक्षा, युद्ध तत्परता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नौसैनिक शक्ति को मजबूत करेगा।

नई दिल्ली/एजेंसी। भारतीय नौसेना इस महीने अपने बेड़े में पांच स्वदेशी हथियार को शामिल करने की तैयारी कर रही है। इनमें दो प्रोजेक्ट 17ए स्टील्थ फ्रिगेट, सर्वेक्षण पोत और दो पनडुब्बी रोधी युद्धक विमान शामिल हैं। मेड इन इंडिया के तहत बने ये जहाज समुद्री सुरक्षा, युद्ध तत्परता और तटीय रक्षा को काफी मजबूत करेंगे। ये इंडक्शन परिशोधित नौसैनिक ताकत को देश के भीतर ही डिजाइन और निर्माण करने की भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाते हैं, जिससे विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम होगी। नौसेना में शामिल होने वाले पांच प्लेटफॉर्मों में से चार का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा किया गया है। वहीं पांचवां जहाज, आईएनएस महेंद्रगिरि, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा तैयार किया गया है।
औपचारिक रूप से चालू होने के बाद, स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस महेंद्रगिरि, सर्वेक्षण पोत संशोधक और एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट अग्रय और मालवन नौसेना को उन्नत स्टील्थ, बेहतर पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताएं और उन्नत महासागर निगरानी प्रदान करेंगे।
आईएनएस दूनागिरी जीआरएसई द्वारा निर्मित प्रोजेक्ट 17ए स्टील्थ फ्रिगेट है। यह युद्धपोत आधुनिक सेंसर, परिष्कृत हथियार प्रणालियों और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध सुविधाओं से लैस है। आईएनएस महेंद्रगिरि भी इसी श्रेणी का दूसरा प्रोजेक्ट 17ए स्टील्थ फ्रिगेट है।
दोनों युद्धपोत स्वदेशी युद्धपोतों की एक नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनका उद्देश्य भारत की समुद्री शक्ति को बढ़ाना, युद्धक पहुंच बढ़ाना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ब्लू-वाटर क्षमताओं का विस्तार करना है। ये दोनों ही पोत सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल, बराक-8 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, शुरुआती खतरे का पता लगाने और ट्रैकिंग के लिए शक्तिशाली एमएफ-स्टार एईएसए रडार, और आधुनिक टॉरपीडो ट्यूब एवं रॉकेट लॉन्चरों से लैस होंगे। सर्वेक्षण पोत (लार्ज) संशोधक को उन्नत हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण और समुद्र तल की मैपिंग संचालन के लिए डिजाइन किया गया है। यह जहाज पानी के नीचे की खोज और समुद्री डोमेन जागरूकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
दूसरी ओर, अग्रय और मालवन एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट हैं। इन्हें विशेष रूप से उथले तटीय पानी में काम करने वाली दुश्मन की पनडुब्बियों की पहचान करने, उन पर नजर रखने और उन्हें बेअसर करने के लिए डिजाइन किया गया है।
भारतीय नौसेना वर्तमान में लगभग 130 से 140 जहाजों का संचालन करती है और हर 40 दिनों में अपने रोस्टर में स्वदेशी युद्धपोतों या पनडुब्बियों को जोड़ रही है। यह प्रस्तावित बेड़ा विस्तार 2035 तक 200 युद्धपोतों और पनडुब्बियों के साथ एक मजबूत नौसेना बनाने के सरकार के विजन का हिस्सा है। ये नए जहाज नौसेना को चीनी नौसेना की बढ़ती उपस्थिति के खिलाफ हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अपना दबदबा स्थापित करने और अपने समुद्री पदचिह्न को बढ़ाने में मदद करेंगे।

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