भीषण गर्मी में मायरा की गुफाओं में बह रहे झरने, इतिहास और प्रकृति का अनूठा संगम
राजस्थान में जहां भीषण गर्मी के चलते अधिकांश जलस्रोत सूखने लगे हैं, वहीं महाराणा प्रताप की ऐतिहासिक शस्त्रागार रही मायरा की गुफाओं में इन दिनों प्राकृतिक झरने बह रहे हैं।

उदयपुर/राजस्थान। राजस्थान में जहां एक ओर भीषण गर्मी के कारण अधिकांश जलस्रोत सूखने की स्थिति में हैं, वहीं उदयपुर जिले के गोगुंदा क्षेत्र में स्थित मायरा की ऐतिहासिक गुफाओं में इन दिनों प्राकृतिक झरने बह रहे हैं। अरावली पर्वतमाला के बीच स्थित यह स्थल इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत मेल प्रस्तुत कर रहा है, जिससे पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों का आकर्षण लगातार बढ़ता जा रहा है।
हल्दीघाटी के समीप स्थित मायरा की गुफाओं का विशेष ऐतिहासिक महत्व रहा है। मेवाड़ के महान वीर महाराणा प्रताप ने अपने संघर्षकाल के दौरान इन गुफाओं का उपयोग शस्त्रागार और रणनीतिक केंद्र के रूप में किया था। दुर्गम और सुरक्षित स्थान होने के कारण यहां हथियारों का भंडारण किया जाता था तथा सैन्य गतिविधियों का संचालन भी यहीं से होता था। गुफा तक पहुंचने के लिए उस समय पहाड़ों और घने जंगलों से होकर गुजरना पड़ता था, जिससे यह स्थान शत्रुओं की नजर से सुरक्षित बना रहता था।
वर्तमान में भी गुफाओं के भीतर और आसपास चट्टानों से लगातार पानी रिसता रहता है, जिससे छोटे-छोटे झरने बहते रहते हैं। यही कारण है कि तेज गर्मी के मौसम में भी यहां का वातावरण अपेक्षाकृत ठंडा और सुकूनभरा बना रहता है।
इतिहास और प्राकृतिक धरोहर से समृद्ध यह स्थल पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यहां तक पहुंच मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था, सूचना पट्ट और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाए, तो मायरा की गुफाओं को मेवाड़ के प्रमुख ऐतिहासिक और इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
इतिहासविज्ञ राहुल शर्मा के अनुसार यह गुफा न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसकी प्राकृतिक संरचना और जलधाराएं इसे विशिष्ट बनाती हैं। करीब एक किलोमीटर से अधिक लंबाई में फैली यह गुफा गर्मी के मौसम में भी बहते झरनों और प्राकृतिक जलस्रोतों के कारण खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। अक्टूबर से मार्च के बीच यहां घूमने का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है।



