श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई डॉ. प्रभाकर राव चावरे की दूसरी पुण्यतिथि, विज्ञान, अध्यात्म और समाजसेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को किया गया याद

राजू बोहरा / वरिष्ठ संवाददाता
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2026। महान वैज्ञानिक एवं समाजसेवी डॉ. प्रभाकर राव गोविंद राव चावरे की दूसरी पुण्यतिथि उनके पुत्र श्री बलवंत कुमार चावरे द्वारा अत्यंत श्रद्धा, सम्मान एवं भावपूर्ण स्मरण के साथ मनाई गई।
इस अवसर पर अनेक गणमान्य व्यक्तियों एवं शुभचिंतकों ने उपस्थित होकर डॉ. चावरे को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके व्यक्तित्व, कृतित्व तथा समाज के प्रति उनके योगदान को याद किया। सभी ने उनके आदर्शों, विचारों और समाजसेवा के प्रति समर्पण को स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

बताते चलें कि दो वर्ष पूर्व, 9 अक्टूबर 2024 को 87 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया था। संयोगवश, इसी तारीख को देश के प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा का भी निधन हुआ था। जहाँ रतन टाटा ने उद्योग जगत में अपनी दूरदर्शिता और सामाजिक सरोकारों से विशिष्ट पहचान बनाई, वहीं डॉ. प्रभाकर राव चावरे ने विज्ञान, अध्यात्म और समाजसेवा के क्षेत्र में अपने विचारों एवं कार्यों से योगदान दिया।

ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म को समर्पित जीवन
डॉ. प्रभाकर राव चावरे का जन्म 15 अगस्त 1938 को महाराष्ट्र के अचलपुर क्षेत्र में हुआ था। बचपन से ही उनकी रुचि ज्ञान-विज्ञान के प्रति थी। विज्ञान के साथ-साथ अध्यात्म में भी उनकी गहरी दिलचस्पी थी। उन्होंने रामायण पर भी शोध कार्य किया और अपने अध्ययन के माध्यम से विज्ञान तथा अध्यात्म के बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास किया।

जीवविज्ञान के क्षेत्र में डॉ. राव ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण खोज की। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘Science for Genetic Engineering’ में उन्होंने E–7 (Auto Genetic Theory of Evolution for Genome) नामक स्व-उत्पत्तिवादी सिद्धांत प्रस्तुत किया।

इस खोज को विश्व वैज्ञानिक समुदाय में विशिष्ट स्थान प्राप्त है।

अपनी विशिष्ट खोज के माध्यम से डॉ. राव ने प्रतिपादित किया कि मनुष्य का जन्म किसी बंदर या चिम्पांजी से नहीं हुआ, बल्कि मनुष्य, मनुष्य से ही उत्पन्न हुआ है, जैसे बंदर और चिम्पांजी अपनी-अपनी प्रजातियों से।
उनका कहना था कि यदि मानव का विकास बंदर से हुआ होता, तो आज बंदर और चिम्पांजी जैसी प्रजातियाँ अस्तित्व में न होतीं। उन्होंने वैज्ञानिक तर्कों और प्रायोगिक साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध किया कि मनुष्य का विकास भी अन्य प्राणियों की तरह अनुकूल परिस्थितियों के बनने पर स्वतः हुआ।

समाजसेवा और शिक्षा के प्रति आजीवन समर्पण
डॉ. प्रभाकर राव चावरे केवल विज्ञान के क्षेत्र में रुचि रखने वाले विद्वान ही नहीं, बल्कि समाज के वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशीलता रखने वाले समाजसेवी भी थे। उन्होंने अपना जीवन गरीबों, पिछड़े वर्गों, असहाय लोगों और शिक्षा से वंचित समुदायों के उत्थान के लिए समर्पित किया।
इसी उद्देश्य से उन्होंने 14 अप्रैल 1991 को टेक्निकल प्रोफेशनल एजुकेशन इन इंडिया फाउंडेशन (Technical Professional Education in India Foundation) की स्थापना की। संस्था का मुख्य उद्देश्य गरीब एवं वंचित बच्चों, महिलाओं और जरूरतमंद लोगों को शिक्षा तथा कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है।
संस्था के माध्यम से शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक उत्थान से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया गया। डॉ. चावरे के निधन के बाद उनके सुपुत्र बलवंत कुमार संस्था की सेवाओं और सामाजिक कार्यों को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। उनके प्रयासों के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों, महिलाओं और अन्य वंचित वर्गों तक सहायता पहुँचाने का कार्य जारी है।

सम्मान और प्रेरणा का प्रतीक
डॉ. प्रभाकर राव चावरे के समर्थकों और उनसे जुड़े सामाजिक एवं शैक्षणिक क्षेत्रों के लोगों ने उनके योगदान को विशिष्ट बताया है। उनके कार्यों के लिए विभिन्न सामाजिक एवं वैज्ञानिक संस्थाओं द्वारा उन्हें सम्मानित किए जाने का उल्लेख मिलता रहा है।
उनके प्रशंसकों और शुभचिंतकों की ओर से पद्मश्री जैसे राष्ट्रीय सम्मान के लिए उनके नाम पर विचार किए जाने की माँग भी उठती रही। इसी प्रकार, उनके शोध और विचारों को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से कुछ लोगों ने उनके नाम को नोबेल पुरस्कार के लिए प्रस्तावित करने की इच्छा व्यक्त की।
उनके अनुयायियों और समर्थकों ने 10 अगस्त को उनके सम्मान में ‘विश्व मानव दिवस’ (World Human Day) के रूप में मनाए जाने का प्रस्ताव भी रखा है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य मानवता, शिक्षा और समाजसेवा के प्रति उनके समर्पण को स्मरण करना तथा आने वाली पीढ़ियों को इन मूल्यों के प्रति प्रेरित करना है।

मानव कल्याण के लिए समर्पित जीवन
डॉ. प्रभाकर राव गोविंद राव चावरे का जीवन विज्ञान, अध्यात्म और समाजसेवा के प्रति उनकी रुचि एवं प्रतिबद्धता का परिचायक रहा। उन्होंने अपने विचारों, शोध और सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज के विकास तथा मानव कल्याण के विषयों पर ध्यान केंद्रित किया।
उनकी दूसरी पुण्यतिथि उनके जीवन, विचारों और सामाजिक योगदान को स्मरण करने का अवसर है। उनके द्वारा स्थापित संस्था के माध्यम से शिक्षा, कौशल विकास और जरूरतमंदों की सहायता के कार्यों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि का एक सार्थक माध्यम है।
डॉ. प्रभाकर राव चावरे की स्मृति हमें यह संदेश देती है कि ज्ञान की सार्थकता तभी बढ़ती है, जब उसका उपयोग समाज और मानवता के कल्याण के लिए किया जाए।

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