एटीआर बदलकर इमारत की सील खोलने का आरोप, एमसीडी अधिकारियों पर मिलीभगत के सवाल
दिल्ली के गांधी नगर में एमसीडी अधिकारियों पर एक इमारत की सील रिपोर्ट बदलकर लाखों के राजस्व का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा है। यह आरोप सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें अधिकारियों की मिलीभगत से सील खोली गई।

पूर्वी दिल्ली। भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे नगर निगम (एमसीडी) के अधिकारियों पर एक और गंभीर आरोप सामने आया है। आरोप है कि अधिकारियों ने इमारत मालिक से मिलीभगत कर एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) में बदलाव कर सील की गई इमारत को खोल दिया, जिससे निगम को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
मामला सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। आरोपों के अनुसार, जब इमारत को सील किया गया था, उस समय चार फ्लोर को सील दिखाया गया था, लेकिन बाद में रिपोर्ट में बदलाव कर केवल छत को सील दर्शाया गया। इसके आधार पर महज एक लाख रुपये मिसयूज चार्ज के रूप में जमा कराकर सील खोल दी गई।
बताया गया है कि 24 अगस्त 2024 को गांधी नगर के सुभाष मोहल्ला स्थित 9/5700 नंबर की चार मंजिला इमारत को कोर्ट के आदेश पर सील किया गया था। इस इमारत में सिलाई और जींस रंगाई की फैक्ट्री संचालित हो रही थी, जिससे प्रदूषण फैल रहा था।
सीलिंग के दौरान तैयार की गई एटीआर में पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल के साथ छत को भी सील किए जाने का उल्लेख था। हालांकि, हाल ही में एक लाख रुपये राजस्व के रूप में जमा कराकर सील खोल दी गई। आरोप है कि नई रिपोर्ट में केवल छत को ही सील दिखाया गया और बाकी मंजिलों पर चल रही फैक्ट्रियों का जिक्र ही नहीं किया गया।
पूर्व मेयर श्याम सुंदर अग्रवाल ने कहा कि यदि चार मंजिलों को सील किया गया था और केवल एक लाख रुपये ही वसूले गए, तो निगम को करीब दस लाख रुपये तक के राजस्व का नुकसान हो सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि इमारत मालिक से मिलीभगत कर तीन मंजिलों के मिसयूज चार्ज नहीं लिए गए और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
यह पहला मामला नहीं है जब निगम को राजस्व हानि का सामना करना पड़ा हो। हाल ही में गांधी नगर में एक मंदिर के बाहर सात दुकानों को सील किया गया था, जिनमें से छह दुकानों की सील अगले ही दिन बिना किसी आदेश के खोल दी गई थी।
इसके अलावा, नगर निगम पूर्वी जोन के जेई और एई को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किए जाने का मामला भी सामने आ चुका है। इन घटनाओं के बाद निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
मामले में नगर निगम के उपायुक्त डब्ल्यूपी सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
पूर्वी जोन के चेयरमैन रामकिशोर शर्मा ने कहा कि यदि आरोपों में सच्चाई है तो इसकी गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप निगम की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं और अधिकारियों को इस पर संज्ञान लेकर उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।




