दिल्ली के सरकारी स्कूलों पर अब ‘ड्रोन’ की नजर, 360 डिग्री कैमरों से हो रही मैपिंग

दिल्ली के सरकारी स्कूलों की अब ड्रोन और 360 डिग्री कैमरों से डिजिटल मैपिंग की जा रही है, जिससे उनकी वास्तविक स्थिति का रिकॉर्ड बनेगा।

नई दिल्ली। राजधानी के सरकारी स्कूलों की स्थिति अब केवल कागजी दावों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वास्तविक तस्वीर सामने लाने के लिए शिक्षा विभाग ने पहली बार ड्रोन और 360 डिग्री कैमरों के माध्यम से डिजिटल मैपिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पहल के तहत स्कूल भवनों, कक्षाओं, खेल मैदानों और उपलब्ध सुविधाओं का विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, जिसमें स्कूल परिसरों का सजीव दस्तावेजीकरण भी शामिल है।
शिक्षा विभाग ने गर्मी की छुट्टियों तक एक हजार से अधिक स्कूलों की मैपिंग पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके बाद आवश्यकतानुसार इस डेटा को नियमित रूप से अपडेट किया जाएगा, जिससे स्कूलों की स्थिति पर सतत निगरानी रखी जा सके।
विभाग का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया “सीइंग इज बिलीविंग” के सिद्धांत पर आधारित होगी, जिससे जो दिखाई देगा, वही वास्तविकता मानी जाएगी। शिक्षा मंत्री आशीष सूद के अनुसार इस ड्रोन मैपिंग का उद्देश्य व्यवस्था में पारदर्शिता लाना, भ्रष्टाचार और लापरवाही को समाप्त करना तथा अधिकारियों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
डिजिटल मैपिंग के माध्यम से अब अधिकारी अपने कार्यालय में बैठकर ही किसी भी स्कूल की छत, कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, खेल मैदान और शौचालयों की स्थिति का एक क्लिक में निरीक्षण कर सकेंगे। इस प्रक्रिया में प्रत्येक स्कूल के लिए 500 से अधिक उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें और वीडियो तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें कमरों की संख्या के साथ-साथ पंखों, स्विच बोर्ड, डेस्क और अन्य संसाधनों की स्थिति का भी विस्तृत विवरण शामिल होगा।
मैपिंग के दौरान कई स्कूल भवन जर्जर और असुरक्षित स्थिति में पाए गए हैं। ऐसे मामलों में मरम्मत कार्यों को लेकर लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, वहीं लंबे समय से लंबित कार्यों को पूरा कराने के लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। दरियापुर कलां क्षेत्र के 13 भवनों की मैपिंग अगले एक महीने में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
रिपोर्ट में कुछ चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं। कई स्कूलों में बैडमिंटन कोच नियुक्त हैं, लेकिन वहां कोर्ट नहीं है, जबकि कुछ स्कूलों में स्विमिंग पूल होने के बावजूद वहां फुटबॉल शिक्षक तैनात हैं। इस प्रकार की विसंगतियों को दूर करने के लिए विभाग वैज्ञानिक आधार पर स्टाफ और संसाधनों के पुनर्विन्यास की योजना बना रहा है।
शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक स्तर पर भी सख्ती के संकेत दिए हैं। सीबीएसई के नए नियमों के तहत अब 80 अंकों की लिखित परीक्षा में छात्रों को न्यूनतम 27 अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि खराब परीक्षा परिणामों पर संबंधित स्कूलों की जवाबदेही तय की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
इसके साथ ही शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहत देने की तैयारी भी की जा रही है, ताकि वे अधिक समय शिक्षण कार्य पर केंद्रित कर सकें और छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके।

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