पद्मश्री से सम्मानित डायरेक्टर भारतीराजा का निधन, सीएम विजय ने की राजकीय सम्मान के साथ विदाई की घोषणा

दिग्गज तमिल फिल्म निर्देशक भारतीराजा का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया, जिससे भारतीय सिनेमा में एक युग का अंत हो गया। ग्रामीण पृष्ठभूमि की कहानियों से तमिल सिनेमा को नई दिशा देने वाले भारतीराजा को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए मुख्यमंत्री विजय ने राजकीय सम्मान देने की घोषणा की है।

चेन्नई/एजेंसी। तमिल सिनेमा के महान निर्देशक, निर्माता और पटकथा लेखक भारतीराजा का बुधवार को आयु संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया। 84 वर्षीय पद्मश्री सम्मानित भारतीराजा ने चेन्नई स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से भारतीय सिनेमा, विशेषकर तमिल फिल्म उद्योग ने एक ऐसे फिल्मकार को खो दिया जिसने फिल्मों को स्टूडियो की सीमाओं से निकालकर गांवों और वास्तविक परिवेश तक पहुंचाया।
भारतीराजा ने 1977 में अपनी पहली फिल्म ‘16 वयाथिनिले’ से तमिल सिनेमा को नई दिशा दी। इस फिल्म ने ग्रामीण जीवन की सादगी और यथार्थ को पर्दे पर जीवंत किया। कमल हासन, रजनीकांत और श्रीदेवी अभिनीत यह फिल्म लंबे समय तक बॉक्स ऑफिस पर छाई रही। इसके बाद उन्होंने ‘सिगप्पु रोजाक्कल’, ‘अलैगल ओइवथिल्लै’, ‘मुधल मरियाथै’ और ‘करुथम्मा’ जैसी फिल्मों से सामाजिक मुद्दों और संवेदनशील कथानकों को नई ऊंचाई दी।
भारतीराजा को प्यार से ‘‘इयक्कुनर इमयम’’ कहा जाता था, जिसका अर्थ है ‘‘निर्देशक जगत का शिखर पुरुष’’। उन्होंने कई नई प्रतिभाओं को पहचान दिलाई और तमिल सिनेमा में अभिनेत्रियों राधिका, रेवती, राधा और रेखा सहित अनेक कलाकारों को स्थापित किया।
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, रजनीकांत, कमल हासन और अन्य फिल्मी हस्तियों ने उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि भारतीराजा को राजकीय सम्मान प्रदान किया जाएगा। द्रमुक अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने उनके निधन को तमिल सिनेमा के लिए ‘‘बहुत बड़ी क्षति’’ बताया।
भारतीराजा ने अपने करियर के उत्तरार्ध में अभिनय भी किया और ‘आयुधा एझुथु’, ‘पांडियानाडु’ और ‘थिरुचित्राम्बलम’ जैसी फिल्मों में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। हाल की ब्लॉकबस्टर ‘महाराजा’ और मलयालम फिल्म ‘थुडरुम’ में भी उनका अभिनय सराहा गया।
भारतीराजा का जन्म 17 जुलाई 1941 को तमिलनाडु के थेनी जिले में हुआ था। साधारण पृष्ठभूमि से उठकर उन्होंने पांच दशकों में तमिल, तेलुगु और हिंदी में 40 से अधिक फिल्मों का निर्देशन किया। उनके निधन को फिल्म जगत ने भारतीय सिनेमा के एक स्वर्णिम युग का अंत बताया है। अंतिम संस्कार की घोषणा परिवार द्वारा बाद में की जाएगी।

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