उत्तराखंडी लोक संगीत की पहचान बनती गायिका प्रियंका छिम्वाल तिवारी

Raju Bohra / Senior Bollywood Journalist
उत्तराखंड की सुरीली हवाओं और समृद्ध संस्कृति में पले-बढ़े लोक कलाकार हमेशा अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं। ऐसी ही एक प्रतिभावान गायिका हैं प्रियंका छिम्वाल तिवारी जो बिना किसी औपचारिक संगीत शिक्षा के भी बतौर गायिका अपनी सुरीली आवाज से लोगों के दिलों में एक खास जगह बना रही है।
उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कोटाबाग की रहने वाली प्रियंका छिम्वाल तिवारी आज लोक संगीत के क्षेत्र में एक जाना-माना नाम बन चुकी हैं। प्रियंका ने सिर्फ 5 साल की उम्र में अपना पहला गाना गाया था। उन्होंने संगीत की कोई औपचारिक पढ़ाई नहीं की है, फिर भी वे साल दो हज़ार से लगातार पेशेवर तरीके से गा रही हैं।
पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो प्रियंका ने बीएससी (B.Sc) करने के बाद एमबीए (HR) और बी.एड (B.Ed) की डिग्री हासिल की है। वे अभी अपने परिवार के साथ इंदिरापुरम (गाजियाबाद) में रहती हैं।
गीत गाने का उनका सपना उनके पति के सहयोग से पूरा हुआ। इसके अलावा लोक कलाकार प्रकाश काहला जी, शिबू रावत जी और गोपाल मठपाल जी ने भी उनका पूरा साथ दिया।
प्रियंका को गाने के अलावा सिलाई करने और ड्राइंग बनाने का भी बहुत शौक है। वे हिंदी गायकों में लता मंगेशकर, सोनू निगम, उदित नारायण और श्रेया घोषाल को बहुत पसंद करती हैं।
‘बाला गोरिया’ से लेकर ‘त्यर जुवारी च्यल’ तक: कई बड़े कलाकारों के साथ किया काम
प्रियंका छिम्वाल तिवारी के गाए कई कुमाऊंनी और गढ़वाली गीत यूट्यूब पर काफी पसंद किए जाते हैं। इनमें ‘बाला गोरिया’, ‘बसंत ऋतु की बहार’, ‘पिछौड़ी का लाल बूटा’, ‘नखरेबाज किशना’, ‘तेरी मेरी माया’, ‘फिर ऐगे तेरी याद’, ‘विदाई’ और ‘त्यर जुवारी च्यल’ जैसे लोकप्रिय गीत शामिल हैं।
उन्होंने उत्तराखंड के कई मशहूर कलाकारों के साथ मंच साझा किया है। इनमें स्वर्गीय प्रहलाद मेहरा जी, स्वर्गीय हीरा सिंह राणा जी, प्रकाश काहला जी, बिशन हरियाला जी, प्रीतम भरतवाण जी, हेमा नेगी करासी जी, मुकेश कठैत जी, गोपाल मठपाल जी, राकेश खनवाल जी, गजेंद्र राणा जी, खुशी जोशी जी, संजय आर्य जी, सौरभ मैथानी और नवीन पाठक जी शामिल हैं।
हाल ही में उनका नया गाना ‘त्यर जुवारी च्यल’ रिलीज हुआ है। प्रियंका ने बताया कि जल्द ही उनका एक पारंपरिक ‘झोड़ा गीत’ और मां झूला देवी का एक नया भजन भी आने वाला है।




