स्वास्थ्य, कौशल और शिक्षा के क्षेत्र में और बेहतर कार्य करने की जरूरत है : बलवंत चावरे

राजू बोहरा / वरिष्ठ संवाददाता

नई दिल्ली। समाज में वास्तविक परिवर्तन केवल विचारों से नहीं, बल्कि निरंतर सेवा, समर्पण और सकारात्मक कार्यों से आता है। कुछ लोग अपने जीवन को केवल अपनी सफलता तक सीमित नहीं रखते, बल्कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्ग के उत्थान को अपना उद्देश्य बना लेते हैं। ऐसे ही प्रेरणादायी व्यक्तित्व हैं टेक्निकल प्रोफेशनल एजुकेशन इन इंडिया फाउंडेशन के निदेशक एवं वरिष्ठ समाजसेवी बलवंत चावरे, जो पिछले लगभग 37 वर्षों से स्वास्थ्य, कौशल विकास और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।

बलवंत चावरे के नेतृत्व में उनकी संस्था ने आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों, युवाओं और महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सराहनीय कार्य किया है। संस्था का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि लोगों को सम्मानजनक आजीविका और आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने के लिए सक्षम बनाना है। इसी समर्पण के कारण संस्था आज सामाजिक सेवा के क्षेत्र में एक विश्वसनीय पहचान बना चुकी है।

गौरतलब है कि टेक्निकल प्रोफेशनल एजुकेशन इन इंडिया फाउंडेशन की स्थापना 1985 में हुई थी पर वर्ष 1991 में बैसाखी के दिन 14 अप्रैल को संस्थापक स्वर्गीय डॉ. प्रभाकर राव चावरे जी ने संस्था को पूर्णरूप से दूसरों की सेवा के लिए समर्पित किया और हाल ही में बलवंत चावरे जी ने संस्था का 36वाँ स्थापना दिवस मनाया। स्थापना के समय से ही संस्था शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक उत्थान के विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से समाज की सेवा कर रही है।

बलवंत चावरे अपनी प्रेरणा का श्रेय अपने पिता, प्रख्यात भारतीय वैज्ञानिक एवं संस्था के संस्थापक स्वर्गीय डॉ. प्रभाकर राव चावरे को देते हैं। वे बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें अपने पिता के साथ सामाजिक कार्यों में भाग लेने का अवसर मिला, जिसने सेवा, अनुशासन और मानवता के संस्कार उनके व्यक्तित्व में स्थापित किए। स्वर्गीय डॉ. प्रभाकर राव चावरे पर्यावरण संरक्षण के भी प्रबल समर्थक थे और उन्होंने अपने जीवनकाल में हजारों पौधे लगाकर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया।

स्वर्गीय डॉ. प्रभाकर राव चावरे ने लगभग चार दशकों के शोध के बाद वर्ष 2012 में अपनी चर्चित पुस्तक “साइंस फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग” प्रकाशित की, जिसका उल्लेख इंडियन जर्नल ऑफ़ साइंटिफिक रिसर्च में भी किया गया। विज्ञान और समाज सेवा के क्षेत्र में उनका योगदान आज भी प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

बलवंत चावरे सामाजिक सेवा के साथ-साथ साहित्य और सृजनात्मक गतिविधियों में भी विशेष रुचि रखते हैं। उन्हें कविता लेखन का शौक है और वे एक पुस्तक के लेखन पर भी कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि समाज के प्रति संवेदनशील सोच और रचनात्मक अभिव्यक्ति, दोनों मिलकर सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
बलवंत चावरे कहते हैं, “आज के समय में स्वास्थ्य, कौशल और शिक्षा ऐसे तीन महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जिन पर विकसित और आत्मनिर्भर समाज की नींव टिकी हुई है।

यदि हम इन क्षेत्रों में और बेहतर कार्य करें, तो देश के लाखों युवाओं, महिलाओं और जरूरतमंद परिवारों का भविष्य उज्ज्वल बनाया जा सकता है। समाज सेवा के प्रति उनका समर्पण, दूरदर्शी सोच और निरंतर प्रयास न केवल अनेक लोगों के लिए प्रेरणा हैं, बल्कि यह संदेश भी देते हैं कि यदि सेवा का संकल्प मजबूत हो, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य संभव है।

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