गुरुग्राम में 2.53 करोड़ की साइबर ठगी, 25 हजार वेतन के लालच में दबोचे गए 12वीं पास 3 युवक

गुरुग्राम में 2.53 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में तीन 12वीं पास युवकों को गिरफ्तार किया गया है। ये आरोपी ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करने का काम करते थे।

गुरुग्राम। निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के लिए काम कर रहे बाहरवीं पास तीन युवकों को साइबर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपित साइबर ठगी से प्राप्त रकम को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करने का काम करते थे। इसके बदले उन्हें 25 हजार रुपये मासिक वेतन के साथ ठगी की रकम में बोनस भी दिया जाता था।
मामला 2.53 करोड़ रुपये की निवेश के नाम पर साइबर ठगी से जुड़ा है। सेक्टर-43 स्थित कार्यालय में पत्रकारवार्ता के दौरान एसीपी साइबर क्राइम गौरव फोगाट ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर साइबर अपराध पश्चिम थाना में केस दर्ज किया गया था।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी गई राशि में से 15 लाख रुपये एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के बैंक खाते में भेजे गए थे। खाते की पड़ताल में चार मोबाइल नंबर जुड़े मिले। तकनीकी विश्लेषण में एक नंबर दिल्ली में सक्रिय पाया गया, जिसके आधार पर पुलिस टीम आरोपितों तक पहुंच गई।
साइबर पुलिस ने दिल्ली से तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया। उनकी पहचान दिल्ली के विवेक विहार स्थित त्रिवेणी अपार्टमेंट निवासी जनक कुमार, रेवाड़ी जिले के बावल निवासी दिनेश कुमार और फतेहाबाद जिले के गांव भूथनखुर्द निवासी पवन कुमार के रूप हुई।
पुलिस पीआरओ संदीप कुमार ने बताया कि आरोपितों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा। रिमांड के दौरान गिरोह के अन्य सदस्यों, बैंक खातों के स्रोत और ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य राज सामने आने की उम्मीद है।
पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि तीनों आरोपितों का संपर्क टेलीग्राम के माध्यम से साइबर ठगी करने वाले गिरोह से हुआ था। इसके बाद उन्हें बैंक खातों के संचालन और रकम को आगे विभिन्न खातों में भेजने का काम सौंपा गया। पुलिस के अनुसार तीनों पिछले करीब छह महीने से इस साइबर ठग गिरोह नेटवर्क के लिए सक्रिय थे। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में मिले बैंकिंग दस्तावेज और इलेक्ट्रानिक उपकरण किए गए हैं। आरोपितों के पास 36 मोबाइल फोन, 53 एटीएम कार्ड, 24 पासबुक, पांच चेकबुक और दो आइपी कैमरे मिले।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार बैंकिंग दस्तावेज और उपकरण यह संकेत करते हैं कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है। बरामद आइपी कैमरों का उपयोग सिम बाक्स और साइबर अपराध से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी में किया जाता है।

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