हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने का संकल्प, मास्टर दिनेश चंद्र जोशी बने बदलाव की मिसाल
एक शिक्षक, हजारों सपने और शिक्षा की नई राह-दिनेश चंद्र जोशी की प्रेरक यात्रा

उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली आने के बाद जोशी ने जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क पढ़ाने से अपने अभियान की शुरुआत की। समय के साथ यह पहल ‘नई सोच नई पहल’ के रूप में आगे बढ़ी। आज आर.के. पुरम, मुनिरका, वसंत विहार, महिपालपुर और आया नगर सहित विभिन्न क्षेत्रों में निःशुल्क पाठशालाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जा रहा है।

उनकी ‘भिक्षा से शिक्षा’ पहल विशेष रूप से उल्लेखनीय है। सड़कों, यातायात सिग्नलों और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले ऐसे बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने का प्रयास किया गया, जो कभी विद्यालय नहीं जा पाए थे। बच्चों के साथ उनके अभिभावकों को भी शिक्षा का महत्व समझाकर उन्हें विद्यालयी शिक्षा की मुख्यधारा में लाने का काम किया गया।
कोरोना महामारी के दौरान जब विद्यालय बंद हुए, तब भी जोशी ने शिक्षा की लौ बुझने नहीं दी। निजी संसाधनों से ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था कर दिल्ली के साथ उत्तराखंड के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी पढ़ाई से जोड़े रखा। उनके मार्गदर्शन में अनेक विद्यार्थियों ने नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों की प्रवेश परीक्षाओं में सफलता हासिल की।

‘श्रीमती हीरा देवी भट्ट पुस्तकालय’ भी उनकी शिक्षा सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां विद्यार्थियों को निःशुल्क पुस्तकें, अध्ययन सामग्री और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। उनके द्वारा जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए ओलंपियाड प्रतियोगिताओं का आयोजन भी शुरू किया गया है, जिससे बच्चों में प्रतिस्पर्धात्मक सोच और आत्मविश्वास विकसित हो रहा है।
मास्टर दिनेश चंद्र जोशी का मानना है कि एक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना उसके साथ-साथ पूरे परिवार और समाज के भविष्य को मजबूत करना है। उनका शिक्षा अभियान इसी विश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है कि समाज का कोई भी बच्चा केवल आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।




