लंबित मामलों का बोझ घटाने की तैयारी में सरकार, तीन साल में न्याय सुनिश्चित करने का लक्ष्य: अमित शाह

मोदी सरकार देश की अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम करने की तैयारी में है, जिसके लिए गृह मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के साथ मिलकर ब्लूप्रिंट तैयार कर रहा है।

नई दिल्ली। देश की अदालतों में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। गृह मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट के साथ मिलकर एक ठोस ब्लूप्रिंट तैयार कर रहा है, ताकि न्याय प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाया जा सके। देशभर की अदालतों में इस समय पांच करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। 26वें अखिल भारतीय फिंगर प्रिंट सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य एफआईआर दर्ज होने से लेकर सजा दिलाने तक की पूरी प्रक्रिया को तीन वर्ष के भीतर पूरा करना है।
उन्होंने कहा कि मामलों के त्वरित निपटारे के लिए सांध्यकालीन अदालतों की स्थापना पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में लंबित आपराधिक मामलों के शीघ्र निपटान के लिए नई व्यवस्था तैयार की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय में देरी किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगी।
गृह मंत्री ने राज्यों के पुलिस महानिदेशकों को संबोधित करते हुए कहा कि वैज्ञानिक आधार पर चार्जशीट तैयार करना और अदालतों के साथ समन्वय बढ़ाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि तीन नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद मामलों के निपटारे में तेजी आई है और कई मामलों में 90 दिनों के भीतर सजा तक दिलाई गई है।
अमित शाह ने कहा कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक जांच के माध्यम से अपराध नियंत्रण को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अपराधी कितना भी चालाक क्यों न हो, कानून और विज्ञान के संयुक्त प्रयासों से बच नहीं सकता। फिंगरप्रिंट और अन्य डेटा बेस तैयार करने के साथ-साथ अत्याधुनिक तकनीक के उपयोग से पारंपरिक पुलिसिंग मॉडल से आगे बढ़कर साक्ष्य आधारित जांच को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि आदतन अपराधियों पर अंकुश लगाने और अंतरराज्यीय अपराध नेटवर्क को पहले ही रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और पैटर्न एनालिसिस पर आधारित नया फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है। इस दिशा में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो और पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो की भूमिका महत्वपूर्ण बताई गई।
गृह मंत्री के अनुसार, देश में पुलिसिंग का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब तक एक करोड़ 29 लाख फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड, नौ लाख नार्को अपराधियों का डेटा और तीन लाख 65 हजार मानव तस्करी से जुड़े रिकॉर्ड को एआई आधारित विश्लेषण के जरिए उपयोगी खुफिया जानकारी में बदला जा रहा है। इसके अलावा देश के सभी 17,840 पुलिस थानों को सीसीटीएनएस से जोड़ा जा चुका है और करोड़ों ऑनलाइन रिकॉर्ड का विश्लेषण कर अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी को और प्रभावी बनाया जा रहा है।

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