साउथ-ईस्ट दिल्ली के जैतपुर थाने में तैनात एसआई और एसएचओ पर सबूत मिटाने के आरोप, कोर्ट में खुली पोल

साउथ-ईस्ट दिल्ली के जैतपुर थाने में तैनात एसआई और एसएचओ पर फर्जी जमीन दस्तावेज मामले में सबूतों से छेड़छाड़ और आरोपियों को बचाने के आरोप लगे हैं। साकेत कोर्ट में पेश हुई दो अलग अलग रिपोर्टों के बाद मामले की जांच पर सवाल खड़े हो गए हैं।

दिल्ली ब्यूरो। साउथ-ईस्ट दिल्ली के जैतपुर थाने में तैनात एक सब इंस्पेक्टर (एसआई) और एसएचओ पर गंभीर आरोप लगे हैं। मामला जमीन के फर्जी दस्तावेजों और पुलिस द्वारा कथित रूप से आरोपियों को बचाने के लिए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने का है।
मामले का खुलासा साकेत कोर्ट में एफआईआर दर्ज करवाने की अर्जी की सुनवाई पर हुआ। कोर्ट अर्जी को खारिज करने जा रही थी। उसी दौरान पीड़ित पक्ष के वकील ने SI की बनाई एक और रिपोर्ट पेश की, जिसे एसआई ने बनाया तो था मगर अपने अधिकारियों या कोर्ट के सामने पेश नहीं किया। इसमें साफ लिखा था कि पीड़त पक्ष की शिकायत पर केस दर्ज होना बनता है। कोर्ट ने जब इस रिपोर्ट और बाकी दस्तावेज के बारे में पूछा तो उसने कहा वह देखकर बता पाएगा। जिसके बाद कोर्ट ने मामले में सुनवाई के लिए दूसरी तारीख दे दी है।
पीड़ित अमित कुमार ने अपनी लिखित शिकायतों में बताया कि संजय शर्मा, मनोज यादव और ओमप्रकाश ने उनके प्लॉट के नकली दस्तावेज बनाकर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया। जब मामला पुलिस के पास पहुंचा तो आरोप है कि जांच अधिकारी SI इंद्रजीत यादव ने निष्पक्ष जांच करने के बजाय कथित तौर पर रिश्वत की मांग की। पीड़ित का आरोप है कि पैसे न देने पर आईओ ने केस की रिपोर्ट बदल दी और आरोपियों का पक्ष लेना शुरू कर दिया। जो लोग उस जमीन के आस-पास की जमीन पर रहे हैं, उनके बयान दर्ज किए थे, उन बयानों को भी फाइल से हटा दिया। जिसके बाद पीड़ित पक्ष ने इंसाफ के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
मामले में नया मोड़ तब आया जब कोर्ट में सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी की पोल खुल गई। पीड़ित पक्ष ने कोर्ट के समक्ष वह मूल रिपोर्ट पेश कर दी, जिसे आईओ ने दबा दिया था और उसकी जगह एक बदली हुई रिपोर्ट फाइल की थी। दो अलग-अलग रिपोर्ट सामने आने से जांच अधिकारी की कार्यप्रणाली पर गहरा संदेह पैदा हो गया है। इस गंभीर विसंगति को देखते हुए कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 मई की तारीख मुकर्रर की है।
शिकायतकर्ता के पास जांच अधिकारी की कई कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी हैं। इन रिकॉर्डिंग्स में आईओ खुद यह स्वीकार कर रहा है कि एक आरोपी संजय थाने के अंदर आया और उसकी फाइल से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज चोरी करके ले गया। चौंकाने वाली बात यह है कि उसने इसकी जानकारी एसएचओ सुनील यादव को भी दी थी, लेकिन एसएचओ ने आरोपी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होने दी।
पीड़ित ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत विजिलेंस, गृह मंत्री, उप-राज्यपाल और पुलिस शिकायत प्राधिकरण को भेजी है। पीड़ित ने मांग की है कि सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। यह मामला न केवल दिल्ली पुलिस की छवि पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे सिस्टम के अंदर मौजूद कुछ लोग न्याय की प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास करते हैं।

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