नेपाल में रोहिंग्या मुस्लिमों की एंट्री रोकने की तैयारी, भारतीयों के लिए आईडी कार्ड अनिवार्य, ऐक्‍शन में आई बालेन सरकार

रिपोर्ट के मुताबिक ये फैसला पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद लिया गया है। प्रशासन ने यह आकलन किया है कि भारतीय जनता पार्टी के वहां सरकार बनाने के बाद रोहिंग्या मुसलमान भारत के पश्चिम बंगाल से भागकर नेपाल में प्रवेश कर सकते हैं।

काठमांडू/एजेंसी। नेपाल जाने के लिए अब भारतीयों को अपना आईडी कार्ड दिखाना होगा। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबित मोरंग के सीमावर्ती इलाके में जोगबनी सीमा चौकी से नेपाल जाने के लिए पहचान पत्र अनिवार्य कर दिया गया है। मोरंग जिला सुरक्षा समिति ने सीमावर्ती क्षेत्र में अवैध घुसपैठ और आपराधिक गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए यह फैसला लिया है।
मोरंग के सहायक मुख्य जिला अधिकारी सरोज कोइराला के मुताबिक यह फैसला नेपाल की तरफ से लिया गया है लेकिन ये पूरी तरह से सुरक्षा पर आधारित है। उन्होंने कहा “यह दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से नहीं किया गया है। यह पूरी तरह से नेपाल की सीमा पर सुरक्षा को थोड़ा और सख्त करने और जांच-पड़ताल के लिए है क्योंकि सीमा पार से अवैध घुसपैठ की संभावना बनी हुई है।”
रिपोर्ट के मुताबिक ये फैसला पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद लिया गया है। प्रशासन ने यह आकलन किया है कि भारतीय जनता पार्टी के वहां सरकार बनाने के बाद रोहिंग्या मुसलमान भारत के पश्चिम बंगाल से भागकर नेपाल में प्रवेश कर सकते हैं। रिपोर्ट में भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला दिया गया है कि बीजेपी की सरकार बनने के बाद बांग्लादेश के अवैध घुसपैठिये या रोहिंग्या नेपाल में दाखिल हो सकते हैं। सूत्रों का दावा है कि इसी वजह से नेपाल की ओर सतर्कता बढ़ा दी गई है।
रेतोपति के मुताबिक सूत्र ने कहा “पश्चिम बंगाल में बीजेपी के बहुमत के साथ सरकार बनाने के बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल है। भारतीय मीडिया में ऐसी खबरें आ रही हैं कि रोहिंग्या मुसलमान वहां से भाग रहे हैं। यह सच है या नहीं यह तो पता नहीं लेकिन भारतीय मीडिया में मुसलमानों के अपने सामान के साथ भागने के वीडियो सामने आ रहे हैं।” रिपोर्ट में बताया गया है कि नेपाल की सरकार इस मुद्दे को कूटनीतिक मामले के बजाए आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से देख रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रशासन ने ट्रेन के आने के समय विशेष निगरानी बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। चूंकि हर समय कड़ी जांच करने से दिक्कतें हो सकती हैं इसलिए ट्रेनों के आने के समय जब 500 से 1000 लोग एक साथ प्रवेश करते हैं तो उनके आईडी कार्ड की जांच के लिए व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सीमा पर अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए प्रशिक्षित कुत्तों का भी इस्तेमाल किया गया है। प्रशासन के मुताबिक रोहिंग्याओं के अलावा फरार कैदियों की आवाजाही को रोकना भी एक और मुख्य उद्देश्य है। सूत्र बताते हैं “हमारे लगभग 500 फरार कैदी भारत चले गए हैं। सुरक्षा निगरानी बढ़ा दी गई है क्योंकि वे आ-जा सकते हैं।” यह कदम विदेश मंत्रालय के निर्देश पर नहीं, बल्कि जिला स्तरीय सुरक्षा समिति के निर्णय पर उठाया गया है।

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