जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब
एसआईआर मामले में राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत अन्य को नोटिस; अदालत ने कहा- न्यायपालिका पर दबाव नहीं बनाया जा सकता

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल के दर्जे से हटाए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत जंतर-मंतर को प्रदर्शन के आधिकारिक स्थल के रूप में हटाए जाने से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान पूर्व न्यायाधीश और वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने दलील दी कि विरोध-प्रदर्शन के लिए ऐसा स्थान होना चाहिए, जहां प्रदर्शनकारियों की आवाज जिम्मेदार अधिकारियों तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।
मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि किसी की बात सुने जाने के अर्थ को तकनीक के नजरिए से भी समझा जाना चाहिए। अदालत की टिप्पणी के बाद प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और प्रशासन तक नागरिकों की पहुंच को लेकर बहस ने नया आयाम ले लिया है।
इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं की ओर से दायर एक अन्य याचिका पर निर्वाचन आयोग और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। अदालत ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से भी जवाब मांगा है। यह मामला मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
अदालत ने विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च निकालने से संबंधित याचिका पर राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य संबंधित पक्षों को भी नोटिस जारी किया है। सुनवाई के दौरान पीठ ने 13 याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर गंभीर आपत्ति जताई और उसके व्यवहार को लेकर सवाल उठाने की बात कही।
वकीलों की ओर से सुनवाई के दौरान इस बात का उल्लेख किया गया कि विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर सोमवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च निकाला गया। कुछ वकीलों ने आरोप लगाया कि इस तरह के प्रदर्शन के जरिए न्यायपालिका पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका को किसी भी तरह के दबाव या धमकी के जरिए प्रभावित नहीं किया जा सकता। पीठ ने यह भी कहा कि अदालत जमीनी हकीकत से अनजान नहीं है। अदालत ने संबंधित याचिका को पहले से लंबित मामलों के साथ जोड़ने का निर्देश देते हुए जवाब दाखिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
अब केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस, निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब के बाद इन मामलों में आगे की सुनवाई होगी। जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल के दर्जे से जुड़ा मामला नागरिकों के विरोध के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा माना जा रहा है।




