कौन बनेगा करोड़पति’ सीजन-18 में लक्ष्मी नगर की दोयल बोस ने बढ़ाया दिल्ली का मान, वाइल्ड कार्ड एंट्री के जरिए फिर पहुंचीं केबीसी के मंच पर, पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में भी बनाई खास पहचान

Raju Bohra / Senior Correspondent New Delhi

सफलता उन्हीं लोगों को मिलती है, जो अपने सपनों पर विश्वास रखते हुए निरंतर मेहनत करते हैं। इस विचार को अपने जीवन में चरितार्थ करने वाली दिल्ली के लक्ष्मी नगर निवासी दोयल बोस ने वर्ष 2026 में सोनी टीवी के लोकप्रिय ज्ञानवर्धक कार्यक्रम ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (केबीसी) सीजन-18 में प्रतिभागी के रूप में शामिल होकर अपने क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनके कार्यक्रम के एपिसोड 11 से 17 अगस्त 2026 के बीच प्रसारित हुए। इसके बाद उन्हें वाइल्ड कार्ड एंट्री के जरिए दोबारा केबीसी के मंच पर आने का अवसर मिला, जिसके एपिसोड गणेशोत्सव के दौरान 14 से 17 सितंबर 2026 तक प्रसारित हुए।

दोयल बोस का जीवन और व्यक्तित्व कई राज्यों की सांस्कृतिक एवं सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है। उनका जन्म बंगाली परिवार में हुआ। उनके पिता दीपक कुमार बोस मूल रूप से कोलकाता के रहने वाले थे और सरकारी नौकरी के कारण उनकी पोस्टिंग बिहार में रही, जिसके चलते दोयल का बचपन और जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा सहरसा में बीता। ग्रेजुएशन के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली आईं और यहीं की होकर रह गईं। उनका विवाह जबलपुर, मध्य प्रदेश में हुआ, जबकि वर्तमान में वह नोएडा स्थित एक प्रकाशन संस्थान में हिंदी संपादक के रूप में कार्यरत हैं। इस तरह उनका जुड़ाव पश्चिम बंगाल, बिहार, दिल्ली, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से रहा है।

पिता के जन्मदिन पर आया केबीसी का कॉल
केबीसी में अपने अनुभव को याद करते हुए दोयल बताती हैं कि 4 जुलाई 2026 को सोनी टीवी से केबीसी में शामिल होने के लिए फोन आया तो उन्हें यह सपने के सच होने जैसा लगा। खास बात यह थी कि 4 जुलाई उनके दिवंगत पिता का जन्मदिन भी है। दोयल के अनुसार, उनके पिता की भी इच्छा थी कि उनकी बेटी एक दिन केबीसी के मंच पर पहुंचे।

केबीसी के मंच और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन से मुलाकात को वह अपने जीवन के यादगार अनुभवों में शामिल करती हैं। उन्होंने कहा कि केबीसी के टॉप-10 प्रतियोगियों में जगह बनाना उनके लिए गौरवपूर्ण क्षण रहा। हालांकि वह हॉट सीट तक नहीं पहुंच सकीं, लेकिन उनका कहना है कि अपने सपनों और इरादों पर उन्हें पूरा विश्वास है और वह भविष्य में हॉट सीट तक पहुंचने का सपना भी देखती हैं।
लेखन और पत्रकारिता में भी सक्रिय

दोयल बोस एक लेखिका, पत्रकार, संपादक, नृत्यांगना, समाजसेविका, कवयित्री और कलाकार के रूप में भी अपनी पहचान बना चुकी हैं। हिंदी, अंग्रेजी, बांग्ला, भोजपुरी और मैथिली भाषाओं पर उनकी अच्छी पकड़ है। फ्रीलांस पत्रकार के रूप में वह विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के लिए नियमित रूप से लेखन करती हैं।

उनकी 1300 से अधिक रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें समसामयिक लेख, लघुकथाएं, कविताएं, कहानियां, समीक्षाएं, सेलिब्रिटी इंटरव्यू और आलेख शामिल हैं। उनकी तीन पुस्तकें ‘राष्ट्रीय नायक मोहन भागवत’, ‘बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर’ और ‘संसद की शान हम स्त्री शक्तियां’ प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने चार पुस्तकों का अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद किया है। इनमें ‘चाणक्य और जीने की कला’ बेस्टसेलर पुस्तकों की सूची में भी शामिल रही है।

विभिन्न सम्मानों से सम्मानित दोयल बोस अपनी उपलब्धियों में अपने पति राहुल झारिया के सहयोग को भी महत्वपूर्ण मानती हैं। उनका कहना है कि पति के निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन से उन्हें अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती रही है। दोयल बोस का संदेश है कि यदि लक्ष्य हासिल करना है तो अपनी प्रतिभा को लगातार निखारना चाहिए और सकारात्मक सोच के साथ मेहनत करते रहना चाहिए। उनकी केबीसी यात्रा और बहुआयामी उपलब्धियां युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय हैं।

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