चावड़ी बाजार में तीन मंजिला इमारत ढही, दो की मौत; दो अफसरों पर गिरी गाज,मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका

दिल्ली के चावड़ी बाजार में एक तीन मंजिला निर्माणाधीन इमारत गिरने से दो लोगों की मौत हो गई और सात के मलबे में दबे होने की आशंका है।

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के चावड़ी बाजार स्थित गली शीश महल, शतारा में गुरुवार सुबह एक तीन मंजिला निर्माणाधीन इमारत ढहने से बड़ा हादसा हो गया। घटना में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक घायल व्यक्ति को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया है। मलबे में सात अन्य लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। हादसे के बाद मौके पर राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मंत्री आशीष सूद भी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि अब तक दो शव बरामद किए गए हैं और एक घायल व्यक्ति को बचाया गया है। उन्होंने कहा कि इमारत ग्राउंड प्लस दो मंजिल की थी। भवन गिरने के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा। इस बीच दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कनिष्ठ अभियंता (जेई) और सहायक अभियंता (एई) को निलंबित कर दिया है। वहीं, निर्माण कार्य के लिए जिम्मेदार ठेकेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, चावड़ी बाजार की गली शीश महल, शतारा स्थित संपत्ति संख्या 4548 में गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे हादसा हुआ। लगभग 70 से 80 वर्ग गज क्षेत्रफल में बनी इस इमारत की तीसरी मंजिल की छत की शटरिंग हटाई जा रही थी। इसी दौरान छत अचानक ढह गई। बताया जा रहा है कि तीसरी मंजिल की छत करीब 15 दिन पहले ही डाली गई थी। छत गिरने के बाद भवन की अन्य छतें भी एक के बाद एक ढह गईं, जिससे कई लोग मलबे में फंस गए।

हादसे के बाद स्थानीय लोगों और राहत-बचाव दलों ने मलबे में फंसे लोगों को निकालने का काम शुरू किया। प्रशासन की ओर से बचाव अभियान जारी रखा गया है। घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जुट गई। मलबे में दबे अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

दिल्ली नगर निगम के अनुसार, संबंधित भवन के निर्माण के लिए स्वीकृत भवन नक्शा नहीं लिया गया था। भवन स्वामी या निर्माणकर्ता की ओर से योजना की मंजूरी के लिए निगम में कोई आवेदन भी नहीं किया गया था। इसके बावजूद इमारत में निर्माण कार्य जारी था। निगम का यह भी कहना है कि हादसे से पहले भवन में चल रहे निर्माण कार्य को लेकर उसके पास कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी।

निगम ने संबंधित जेई और एई को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया है। साथ ही भवन गिरने के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या कर्तव्य निर्वहन में चूक सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस हादसे ने एक बार फिर राजधानी में भवन निर्माण के नियमों और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण कार्य तीसरी मंजिल तक कैसे पहुंचा और संबंधित विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली, इसकी जांच अहम होगी। फिलहाल प्रशासन का ध्यान मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और हादसे के कारणों का पता लगाने पर केंद्रित है।

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