चार साल की बच्ची से दुष्कर्म व हत्या मामले में आरोपी को फांसी की सजा, 55 दिन में आया फैसला

पुणे की फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने नसरपुर में 4 साल की बच्ची के रेप और मर्डर केस में आरोपी भीमराव कांबले को मौत की सजा सुनाई है। पॉक्सो एक्ट के तहत 55 दिनों में यह फैसला आया।

पुणे/महाराष्ट्र। महाराष्ट्र के नसरपुर में चार साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के सनसनीखेज मामले में पुणे की विशेष फास्ट-ट्रैक अदालत ने आरोपी भीमराव कांबले (65) को मौत की सजा सुनाई है। पॉक्सो एक्ट के तहत चले इस मामले में महज 55 दिनों के भीतर फैसला सुनाया गया, जिसे राज्य के सबसे तेज निपटाए गए मुकदमों में से एक माना जा रहा है।
भोर तहसील के इस जघन्य मामले में अदालत पहले ही आरोपी को दोषी ठहरा चुकी थी और उसे उम्रकैद या फांसी में से सजा तय करनी थी। विशेष न्यायाधीश एस.आर. सालुंखे की अदालत में रोजाना इन-कैमरा सुनवाई के बाद 29 जून को अंतिम फैसला सुनाया गया।
अभियोजन पक्ष के विशेष लोक अभियोजक अजय मिसर ने अपराध की क्रूरता को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में बताते हुए फांसी की सजा की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपी की उम्र और आरोपों से इनकार को आधार बनाते हुए सजा में नरमी की अपील की थी। इस मामले की सुनवाई तेज गति से पूरी होने के पीछे पुलिस की त्वरित कार्रवाई, 1200 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट और मजबूत फोरेंसिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्य अहम रहे। अदालत ने 55 गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद आरोपी को अपहरण, दुष्कर्म और हत्या का दोषी पाया।
घटना की समयरेखा
1 मई 2026 को नसरपुर गांव में दादी के घर के बाहर खेल रही बच्ची को बहला-फुसलाकर एक गौशाला में ले जाया गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म कर हत्या कर दी गई। ग्रामीणों ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान कर उसे पुलिस के हवाले किया।
घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश देखने को मिला और विरोध प्रदर्शन हुए। पुलिस ने जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। 16 मई को पुलिस ने 15 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की और 28 मई से फास्ट-ट्रैक ट्रायल शुरू हुआ।
21 जून को अंतिम बहस पूरी होने के बाद 25 जून को अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया और 29 जून को उसे फांसी की सजा सुनाई गई। इस फैसले को लेकर न्यायिक प्रक्रिया की तेजी और सख्ती की व्यापक चर्चा हो रही है।

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