मुंडका सेप्टिक टैंक हादसा: जहरीली गैस से तीन मजदूरों की मौत, मालिक सहित तीन गिरफ्तार
मुंडका में तीन मजदूरों की मौत ने फिर उस सवाल को जिंदा कर दिया है, जिसका जवाब वर्षों से नहीं मिल सका है। सीवर और सेप्टिक टैंक की जब मेनुअल सफाई पर रोक है और मशीनों से सफाई के दावे किए जाते हैं, तो आखिर मजदूर अब भी जहरीली गैस से दम घुटने की मौत क्यों मर रहे हैं।

नई दिल्ली। पश्चिमी दिल्ली के मुंडका औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान अरुण (38), संदीप (32) और चांद (42) के रूप में हुई है। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची दमकल टीम ने तीनों को बाहर निकालकर संजय गांधी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने इस मामले में फैक्टरी मालिक सूरज मारवाह, कर्मचारी जयंत और ठेकेदार नीरज के खिलाफ मामला दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी।
हादसे ने मजदूर चांद के परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। उनके पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं, जिनमें ढाई साल की बेटी और आठ महीने का बेटा शामिल हैं। परिजनों के अनुसार चांद दिन में मजदूरी करते थे और शाम को रेहड़ी लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनकी मौत से परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया है।
संदीप के परिजनों ने बताया कि वह बेहद गरीब परिवार से थे और महीने में करीब 12 से 13 हजार रुपये ही कमा पाते थे। उनके परिवार में बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी और एक 12 वर्षीय बेटी हैं। वहीं, अरुण अपने साथियों को बचाने के प्रयास में टैंक में उतरे थे, लेकिन जहरीली गैस की चपेट में आकर उनकी भी जान चली गई।
पुलिस उपायुक्त के अनुसार, घटना की सूचना दोपहर करीब 12 बजे मिली थी। दमकल कर्मियों ने सुरक्षा उपकरण पहनकर टैंक में उतरकर तीनों को बाहर निकाला। आशंका जताई जा रही है कि जहरीली गैस के कारण दम घुटने से मौत हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
जांच में यह भी सामने आया है कि फैक्टरी में सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए ठेका दिया गया था और मजदूरों को बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरण के अंदर उतारा गया। एक मजदूर के बेहोश होने के बाद दूसरे और तीसरे मजदूर भी उसे बचाने के लिए अंदर गए और तीनों की जान चली गई।
इस घटना ने एक बार फिर सेप्टिक टैंक और सीवर सफाई में सुरक्षा मानकों के पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार द्वारा मैनुअल सफाई पर प्रतिबंध और मशीनीकरण के दावों के बावजूद ऐसे हादसे लगातार सामने आ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 से मार्च 2026 तक देशभर में 622 से अधिक मजदूर इस तरह की घटनाओं में जान गंवा चुके हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना सुरक्षा उपकरणों के किसी भी व्यक्ति को सेप्टिक टैंक में उतारना कानूनन प्रतिबंधित है। आवश्यक होने पर गैस जांच, वेंटिलेशन, पीपीई किट, गैस डिटेक्टर और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की व्यवस्था अनिवार्य है। इसके बावजूद लापरवाही के कारण मजदूरों की जान जोखिम में डाली जा रही है।





