लखनऊ अग्निकांड के बाद दिल्ली में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, कई कोचिंग सेंटर बने खतरे का कारण
लखनऊ अग्निकांड के बाद दिल्ली के कोचिंग सेंटरों में अग्नि सुरक्षा की गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। संकरी गलियों में चल रहे इन सेंटरों में न पर्याप्त इंतजाम हैं और न ही आपातकालीन निकास, छात्रों की जान जोखिम में है।

नई दिल्ली। लखनऊ के अलीगंज स्थित तीन मंजिला कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स में सोमवार को लगी भीषण आग में 15 लोगों की मौत ने एक बार फिर देशभर में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक हादसे ने राजधानी दिल्ली में हाल के वर्षों में हुए बड़े अग्निकांडों की यादें ताजा कर दी हैं और सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है।
यह हादसा इस बात का भी संकेत है कि किसी बड़ी घटना के बाद कुछ दिनों तक प्रशासनिक कार्रवाई तो होती है, लेकिन समय बीतने के साथ ही स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण दिल्ली में संचालित हो रहे कोचिंग सेंटर हैं, जो संकरी गलियों और असुरक्षित इमारतों में धड़ल्ले से चल रहे हैं।
मीडिया द्वारा किए गए रियल्टी चेक में सामने आया कि लक्ष्मी नगर से लेकर शकरपुर तक कई कोचिंग सेंटर पांच से छह फीट चौड़ी गलियों में संचालित हो रहे हैं। इन इलाकों में बड़ी संख्या में पीजी भी हैं, जहां छात्र रहते हैं। हालांकि इन इमारतों में न तो अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम हैं और न ही आपातकालीन निकासी के उचित साधन उपलब्ध हैं।
दक्षिणी दिल्ली के कालू सराय इलाके में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। यह क्षेत्र कोचिंग सेंटरों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। पूर्व में हुई घटनाओं के बाद यहां कई संपत्तियों को सील किया गया था, लेकिन समय बीतने के साथ ही फिर से कोचिंग सेंटर संचालित होने लगे हैं। संकरी गलियों में बड़े-बड़े विज्ञापन बोर्ड लगाकर छात्रों को आकर्षित किया जा रहा है।
इसी तरह मुखर्जी नगर में भी बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थानों के कार्यालय स्थित हैं, जहां छात्र और अभिभावक जानकारी लेने के लिए आते हैं। इन स्थानों पर भी अग्निशमन के पर्याप्त प्रबंध न होने के कारण किसी भी समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
उल्लेखनीय है कि ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित राव आईएएस कोचिंग सेंटर में 27 जुलाई 2024 को भारी बारिश के दौरान बेसमेंट में पानी भर जाने से तीन छात्रों की डूबकर मौत हो गई थी। इस घटना के बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए कार्रवाई शुरू की थी।
विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, इस हादसे के बाद 28 जुलाई 2024 से 8 फरवरी 2026 तक सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के चलते 89 कोचिंग सेंटर और 181 लाइब्रेरी सहित कुल 370 प्रतिष्ठानों को सील किया गया, जबकि 899 इकाइयों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। इसके बावजूद सवाल यह बना हुआ है कि कार्रवाई के बाद भी ये संस्थान नियमों की अनदेखी कर कैसे संचालित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त और स्थायी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा हो सकती हैं, जिससे छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बना रहेगा।




