मेरठ में किसानों और पुलिस के बीच टकराव, वार्ता के बाद मामला शांत

मेरठ में 11 सूत्रीय मांगों को लेकर डीएम कार्यालय कूच कर रहे किसानों और सीओ शुचिता सिंह के बीच रास्ते को बाधित करने को लेकर तीखी नौंकझोंक हुई।

मेरठ/उत्तर प्रदेश। मेरठ में किसानों और पुलिस के बीच उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब किसानों को जिलाधिकारी कार्यालय जाने से रोक दिया गया। इस दौरान किसानों और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। हालांकि बाद में वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप से मामला शांत हो गया और किसानों ने ज्ञापन सौंपकर अपना धरना समाप्त कर दिया।
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के कार्यकर्ता 11 सूत्रीय मांगों को लेकर जिलाधिकारी से मिलने के लिए निकले थे। रास्ते में पुलिस द्वारा रोके जाने पर किसानों ने विरोध स्वरूप कमिश्नरी चौराहे पर धरना शुरू कर दिया। इस दौरान किसानों ने अपने ट्रैक्टर सड़क पर खड़े कर चौराहे के तीन दिशाओं से यातायात अवरुद्ध कर दिया, जिससे कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहा।
धरने के दौरान किसान सड़क पर दरी बिछाकर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। किसान नेताओं का आरोप था कि उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी 11 मांगें खाद, कृषि, बिजली, सिंचाई और भूमि विवाद जैसी समस्याओं से जुड़ी हुई हैं, जिन्हें वे जिलाधिकारी के समक्ष रखना चाहते थे।
मौके पर पहुंची सीओ सिविल लाइन शुचिता सिंह ने किसानों को रास्ता बाधित न करने और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की अपील की। उन्होंने ट्रैक्टर हटाने के निर्देश दिए और आवश्यकता पड़ने पर क्रेन बुलाने की तैयारी भी शुरू कर दी। इस पर किसान भड़क गए और चेतावनी दी कि यदि ट्रैक्टर हटाने का प्रयास किया गया तो बड़ा आंदोलन खड़ा होगा।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीओ ने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद एसपी सिटी विनायक गोपाल भौंसले मौके पर पहुंचे और किसान नेताओं से बातचीत की। उन्होंने किसानों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए समाधान का आश्वासन दिया। इस दौरान वे स्वयं धरना स्थल पर किसानों के बीच बैठ गए, जिससे माहौल पूरी तरह शांत हो गया। वार्ता के बाद किसानों ने अपना धरना समाप्त कर ज्ञापन प्रशासन को सौंप दिया।
उल्लेखनीय है कि सीओ शुचिता सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की निवासी हैं और 2018 बैच की पीसीएस अधिकारी हैं। उन्होंने दिल्ली के हिंदू कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की है और गोल्ड मेडल हासिल किया है। पुलिस सेवा में आने से पहले वे मध्य प्रदेश में जिला जनसंपर्क अधिकारी के पद पर कार्य कर चुकी हैं। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें सर्वश्रेष्ठ कैडेट का सम्मान भी मिला। मेरठ में अपनी सेवाओं के दौरान कई चर्चित मामलों में सक्रिय भूमिका के चलते उन्हें “लेडी सिंघम” के नाम से भी जाना जाता है।

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