कश्मीरी गेट पर 35 साल बाद संरक्षण कार्य शुरू, 1857 के निशान रहेंगे सुरक्षित

दिल्ली के ऐतिहासिक कश्मीरी गेट पर 35 साल बाद बड़े पैमाने पर संरक्षण कार्य शुरू हुआ है, जिसे जुलाई अंत तक पूरा किया जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) 1857 की क्रांति के तोपों के निशानों को सुरक्षित रखेगा, जबकि गेट को मजबूती देगा और सूचना पट्ट लगाएगा।

नई दिल्ली। ऐतिहासिक कश्मीरी गेट पर 35 वर्षों बाद बड़े स्तर पर संरक्षण कार्य शुरू किया गया है, जिसे जुलाई के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने 1857 की क्रांति के दौरान तोपों के गोलों से बने ऐतिहासिक निशानों को सुरक्षित रखने का निर्णय लिया है।
एएसआई अधिकारियों के अनुसार, इन निशानों से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी, बल्कि गेट की संरचना को मजबूत बनाने के लिए आसपास के हिस्सों पर कार्य किया जा रहा है। दीवारों की दरारों को पारंपरिक सामग्री जैसे चूना और सुरखी से भरा जा रहा है तथा क्षतिग्रस्त प्लास्टर को दुरुस्त किया जा रहा है।
कश्मीरी गेट मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा बसाए गए शाहजहानाबाद के प्रमुख द्वारों में से एक है और 1857 की क्रांति के दौरान यह मुख्य रणभूमि रहा था। उस समय दागे गए तोपों और गोलियों के निशान आज भी इसकी दीवारों पर मौजूद हैं, जिन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाएगा।
संरक्षण कार्य के साथ ही गेट के आसपास सौंदर्यीकरण भी किया जा रहा है। यहां प्रकाश व्यवस्था, वॉकवे और पर्यटकों के लिए सूचना पट्ट लगाए जाएंगे, ताकि लोग इस ऐतिहासिक स्थल के महत्व को बेहतर ढंग से समझ सकें।

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