उत्तराखंड की पूजा राणा को राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार, नई दिल्ली में राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांव की एएनएम पूजा परमार राणा को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया।

उत्तरकाशी/उत्तराखंड। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांव में तैनात एएनएम पूजा परमार राणा को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार से नवाजा गया है। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें यह सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को प्रदान किया। वह उत्तराखंड से इकलौती नर्स हैं जिन्हें यह सम्मान मिला है।
पूजा परमार राणा को दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से दी जा रही समर्पित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया है।
उन्होंने कोविड महमारी के दौरान यमुना घाटी क्षेत्र में पहली वैक्सीनेटर के रूप में काम किया और शत-प्रतिशत टीकाकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभारी पहुंच सुनिश्चित हो सकी।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, ग्रामीण स्वास्थ्य जागरूकता और जनसेवा में भी उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनके पति आनंद राणा आयुर्वेद विभाग में फार्मासिस्ट के पद पर कार्यरत हैं।
फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म 12 मई 1820 को इटली के फ्लोरेंस शहर में एक समृद्ध परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनके मन में लोगों की सेवा करने की गहरी इच्छा थी। परिवार के विरोध के बावजूद उन्होंने नर्स बनने का निर्णय लिया और अपना जीवन मरीजों की देखभाल व मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया। फ्लोरेंस नाइटिंगेल को आधुनिक नर्सिंग की जननी माना जाता है। उनके योगदान को सम्मान देने के लिए हर वर्ष 12 मई, उनके जन्मदिन पर, दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है।
वर्ष 1965 से इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्सेज इस दिन को आधिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के रूप में आयोजित कर रही है।




