यमुनापार में गहराया जल संकट, पानी माफिया सक्रिय; रोजाना करोड़ों का कारोबार
यमुनापार में दिल्ली जल बोर्ड की नाकामी के कारण गंभीर पेयजल संकट है, जिसका फायदा उठाकर पानी माफिया अवैध भूजल दोहन से बोतलबंद पानी बेच रहे हैं। निवासियों को रोजाना लाखों रुपये खर्च कर पानी के जार खरीदने पड़ रहे हैं, जिससे माफिया का सालाना कारोबार एक हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

पूर्वी दिल्ली। यमुनापार क्षेत्र में लंबे समय से जारी पेयजल संकट के बीच दिल्ली जल बोर्ड घरों तक पर्याप्त पानी पहुंचाने में विफल साबित हो रहा है, जिसका फायदा उठाकर इलाके में पानी माफिया सक्रिय हो गए हैं। अवैध भूजल दोहन के जरिए बोतलबंद पानी और निजी टैंकरों का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है, जिससे आम लोगों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता जा रहा है।
हालिया जनगणना के आंकड़ों के अनुसार यमुनापार के दोनों जिलों में करीब 11 लाख घर हैं, जिनमें से लगभग 50 प्रतिशत परिवार रोजाना करीब 50 रुपये पानी के जार पर खर्च कर रहे हैं। इस हिसाब से प्रतिदिन पानी पर खर्च का आंकड़ा करीब पौने तीन करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
वेस्ट ज्योति नगर, विश्वास नगर, मुस्तफाबाद, भजनपुरा, यमुना विहार, मंडावली, पटपड़गंज, विनोद नगर और आनंद विहार समेत कई इलाकों में लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है या फिर दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है। पिछले तीन महीनों से समस्या का समाधान न होने के कारण हजारों परिवार निजी पानी सप्लायरों पर निर्भर हो गए हैं। स्थानीय निवासियों के मुताबिक 20 लीटर के एक पानी के जार की कीमत 30 से 100 रुपये तक है और मांग बढ़ने पर कीमतों में लगातार वृद्धि हो जाती है। शिव विहार निवासी मोहन झा ने बताया कि इलाके के करीब 10 हजार लोग जल संकट से प्रभावित हैं और कई परिवार रोजाना तीन से चार जार खरीदने को मजबूर हैं।
स्थिति यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज पानी के प्लांटों से कहीं अधिक संख्या में क्षेत्र में सबमर्सिबल पंप संचालित हो रहे हैं, जिससे अनियंत्रित भूजल दोहन की आशंका बढ़ गई है। इसके साथ ही बिना किसी प्रभावी निगरानी के सप्लाई किए जा रहे पानी की गुणवत्ता और सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे प्लांटों और निजी टैंकरों द्वारा बड़े पैमाने पर भूजल दोहन से भूमिगत जल स्तर पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब जल बोर्ड आम जनता को पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, तो निजी कारोबारियों के पास इतनी बड़ी मात्रा में पानी का स्रोत कहां से आ रहा है।
पूर्वी जिला विकास समिति के चेयरमैन अनिल गोयल और उत्तर-पूर्वी जिला समिति के चेयरमैन जितेंद्र महाजन ने बताया कि क्षेत्र में नई पाइपलाइन बिछाने का कार्य जारी है। उनके अनुसार, इससे टूटी पाइपलाइनों से होने वाले जल नुकसान में कमी आएगी और आपूर्ति व्यवस्था में सुधार होगा। आंकड़ों के अनुसार यमुनापार के लोग सालाना एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का खर्च केवल पानी पर कर रहे हैं, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है।




