मरा समझकर कर दी अंत्येष्टि, 13वीं के बाद जिंदा लौटा गिरधर; हत्या का केस रद्द करने की तैयारी
गिरधर, जिसे मृत मानकर उसकी मां ने नहर में मिले शव की पहचान की थी, 13 दिन बाद जिंदा घर लौट आया। पुलिस अब हत्या के मामले को रद्द करने की तैयारी में है, जबकि आरोपी बनाए गए तीन भाई न्याय की मांग कर रहे हैं।

गाजियाबाद। कौशांबी थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जिस युवक को मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया, वह 13वीं के अगले ही दिन जिंदा घर लौट आया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस अब कथित हत्या के मामले को रद्द करने की तैयारी में है।
जानकारी के अनुसार, गिरधर नामक युवक के जेल जाने के बाद उसकी मां देवकी देवी और बहनें आशा व लता उससे मिलने गई थीं और उसे खर्च के लिए 3400 रुपये देकर आई थीं। इसी दौरान गिरधर को जमानत मिल गई और वह जेल से रिहा हो गया। जब परिजन दोबारा उससे मिलने पहुंचे तो उन्हें उसके रिहा होने की जानकारी मिली, जिसके बाद उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई।
इसी बीच मसूरी थाना क्षेत्र के नाहल झाल से एक अज्ञात शव बरामद हुआ, जो सड़ चुका था और पहचान करना मुश्किल था। शव की कद-काठी गिरधर से मिलती-जुलती होने के कारण मां और बहनों ने उसे गिरधर मान लिया, हालांकि कपड़े मेल नहीं खा रहे थे। परिजनों ने यह आशंका जताई कि गिरधर ने जेल से छूटने के बाद नए कपड़े खरीद लिए होंगे, जिसके आधार पर शव की पहचान की गई और अंतिम संस्कार कर दिया गया।
मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब गिरधर की हत्या का आरोप पड़ोस के तीन भाइयों पर लगाया गया। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की और मोबाइल फोन जब्त कर एनसीआर से बाहर रहने की हिदायत दी। करीब 12 दिन तक वे इधर-उधर भटकते रहे और गिरफ्तारी के डर में जीते रहे।
हालांकि, बृहस्पतिवार को गिरधर के अचानक घर लौटने से पूरे मामले का खुलासा हो गया। गिरधर ने पुलिस को बताया कि वह पंजाब के एक आश्रम चला गया था। इसके बाद पुलिस ने गिरधर, उसकी मां और बहनों के बयान दर्ज किए।
प्रारंभिक जांच में पुलिस को साजिश के कोई संकेत नहीं मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि साजिश होती तो कपड़ों के बारे में भी गलत जानकारी दी जा सकती थी, जबकि परिजनों ने शुरू से ही कपड़ों के अलग होने की बात कही थी। इसी आधार पर पुलिस अब हत्या के मामले को निरस्त करने की प्रक्रिया में है।
इस घटनाक्रम से प्रभावित पड़ोसी परिवार ने आरोप लगाया है कि बिना किसी दोष के उन्हें मानसिक उत्पीड़न झेलना पड़ा। परिवार के सदस्यों का कहना है कि पिछले 12 दिनों में उनकी जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई। वहीं, गिरधर के परिजन फिलहाल लोगों से दूरी बनाए हुए हैं।
एसीपी मसूरी अजय सिंह ने बताया कि मामले की जांच जारी है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।




