राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले का वाराणसी में अनोखा विरोध, नाले में किया ‘चंदा चोरों’ का पिंडदान

समाजसेवी रघुकुल यथार्थ शिवांशु ने अयोध्या राम मंदिर निर्माण में कथित चंदा अनियमितता के विरोध में वाराणसी में प्रतीकात्मक पिंडदान किया। उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता पर जोर दिया।

वाराणसी/उत्तर प्रदेश। अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर निर्माण से जुड़े कथित चंदा अनियमितता एवं भ्रष्टाचार के आरोपों के विरोध में वाराणसी के समाजसेवी रघुकुल यथार्थ शिवांशु ने कंदवा क्षेत्र में प्रतीकात्मक रूप से “चंदा चोरों” का नाले में पिंडदान कर विरोध प्रदर्शन किया। इस अवसर पर रघुकुल यथार्थ ने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं।
यदि मंदिर निर्माण अथवा उससे जुड़े किसी भी कार्य में आर्थिक अनियमितता या भ्रष्टाचार के आरोप सामने आते हैं, तो इसकी निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का उपयोग पूरी ईमानदारी और जवाबदेही के साथ होना चाहिए।
नाले में प्रतीकात्मक पिंडदान कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने भ्रष्टाचार और धन के दुरुपयोग के खिलाफ जनजागरण का संदेश देने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है, ताकि जनता का विश्वास कायम रहे। रघुकुल यथार्थ ने संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक, सामाजिक या सार्वजनिक संस्था में भ्रष्टाचार स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
प्रदर्शन में रघुकुल यथार्थ ने यह भी कहा कि जब श्रद्धालु अपने श्रद्धा और विश्वास के साथ दान देते हैं, तो यह आवश्यक है कि उस धन का उपयोग सही तरीके से किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धार्मिक संस्थाओं को अपनी गतिविधियों में पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए, ताकि आम जनता का विश्वास बना रहे।
रघुकुल यथार्थ ने कहा कि यह समय है कि समाज को जागरूक किया जाए और भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। उन्होंने सभी से अपील की कि वे इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाएं और किसी भी प्रकार की अनियमितता के खिलाफ खड़े हों। उन्होंने कहा कि यह केवल एक धार्मिक मामला नहीं है, बल्कि यह समाज के नैतिक मूल्यों से जुड़ा हुआ है।

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