फादर्स डे से पहले बेटे ने दिया जीवन का सबसे बड़ा उपहार, किडनी दान कर बचाई पिता की जान
फादर्स डे से पहले 18 वर्षीय अली रजा ने अपने पिता आबिद रजा को किडनी दान कर नया जीवन दिया, जो दुर्लभ ऑटोइम्यून बीमारी से जूझ रहे थे। मैक्स अस्पताल पटपड़गंज में अलग ब्लड ग्रुप होने के बावजूद जटिल एबीओ-इनकम्पैटिबल किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया।

नई दिल्ली। 21 जून को फादर्स डे से पहले 18 वर्षीय अली रजा ने अपनी किडनी दान कर अपने पिता आबिद रजा को नया जीवन दिया। आबिद रजा दुर्लभ आटोइम्यून बीमारी के कारण तेजी से बढ़ रही किडनी फेल्योर की समस्या से जूझ रहे थे और डायलिसिस पर निर्भर हो चुके थे। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल पटपड़गंज के चिकित्सकों ने दोनों के अलग-अलग ब्लड ग्रुप होने पर भी जटिल एबीओ-इनकम्पैटिबल किडनी ट्रांसप्लांट को सफलतापूर्वक दिया। अस्पताल चिकित्सकों के अनुसार अली का ब्लड ग्रुप बी-पाजिटिव था, जबकि उनके पिता का ओ-पाजिटिव, जिससे प्रत्यारोपण चुनौतीपूर्ण हो गया था।
एबीओ-इनकम्पैटिबल ट्रांसप्लांट मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण
अस्पताल की ट्रांसप्लांट टीम ने एडवांस्ड डीसेंसिटाइजेशन प्रोटोकॉल, प्लाज्माफेरेसिस और विशेष इम्यूनोलाजिकल तैयारी के जरिए यह बाधा दूर की। नेफ्रोलाजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. रवि कुमार सिंह ने कहा कि एबीओ-इनकम्पैटिबल ट्रांसप्लांट उन मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जिन्हें उपयुक्त डोनर नहीं मिल पाता।
वहीं, यूरोलाजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डा. परेश जैन ने अली के फैसले को असाधारण साहस और परिपक्वता का उदाहरण बताया। ट्रांसप्लांट के बाद नई किडनी ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया। आबिद रजा को एक सप्ताह के भीतर और अली को चार दिन बाद स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।




