गाजियाबाद की छात्राओं ने शुरू की प्लास्टिक मुक्त भारत की मुहिम
गाजियाबाद की चार छात्राओं ने पर्यावरण प्रदूषण से मुक्ति के लिए एक स्टार्टअप शुरू किया है। वे प्लास्टिक के इको-फ्रेंडली विकल्प बनाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं।

गाजियाबाद/उत्तर प्रदेश। लंच ब्रेक के दौरान चार छात्राओं के बीच पर्यावरण प्रदूषण पर चल रही चर्चा का मुद्दा उनके स्टार्टअप का आधार बन गया। गुरुकुल द स्कूल में 12वीं छात्राएं अर्शिया सिंह, सिमरन अरोड़ा, अक्षिता जोशी, मान्या त्यागी प्लास्टिक के इस्तेमाल के इको फ्रेंडली विकल्पों पर काम कर प्लास्टिक कचरे का निपटान कर रही हैं। उन्होंने काटन टोट बैग (कपड़े के थैले) जैसे इको-फ्रेंडली उत्पाद पेश किए हैं। सबसे पहले अपने स्कूल की कैंटीन को प्लास्टिक मुक्त बनाया। छात्राएं लोगों को प्लास्टिक के इस्तेमाल से नुकसान के प्रति जागरूक करती हैं।
विभिन्न मेलों में स्टाल लगाकर एवं आनलाइन प्लेटफार्म पर विभिन्न उत्पादों को बेचा जा रहा है। प्लास्टिक कचरे का निस्तारण कर छात्राओं द्वारा चम्मच, बैग, प्लेट आदि बनवाकर बेचा जाता है। छात्राओं का कहना है कि काटन के ऐसे फैब्रिक में थैले बनाए जाते हैं कि वह सालों तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इसके अलावा टूथब्रश एवं लकड़ी की चम्मच, प्लेट, कपड़े के बैग आदि उत्पाद को बनवाकर बेचती हैं।
छात्राओं ने अपनी मुहिम को लेकर इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया हुआ है। जहां से थैलों पर कोट्स लिखने के लिए सुझाव मांगती हैं। ट्रेंडिंग सुझाव को वह थैलों पर प्रिंट कराती हैं। थैले पर लिखे ‘कलेशी औरत’ कोट के बारे में सवाल करने पर उन्होंने कहा कि वह किसी भी चीज को नकारात्मक भाव से नहीं देखते। आज की पीढ़ी अपने स्वभाव एवं व्यवहार को सकारात्मक तौर पर स्वीकार कर रही है। इसके अलावा उन्होंने थैलों पर पर्यावरण प्रदूषण के प्रति जागरूक करने वाले कोट्स भी लिखे हुए हैं।
चारों छात्राओं ने 25 हजार रुपये से बीते वर्ष मई में मुहिम की शुरुआत की थी। यह शुरुआती रकम चारों छात्राओं के अभिभावकों ने दिया था। करीब 10 माह में उन्होंने एक लाख से ज्यादा मुनाफा कमाया। फिलहाल वह कोटेशन लिखे हुए बैग व लकड़ी के टूथ ब्रश आदि विभिन्न मेले में स्टाल लगाकर व आनलाइन प्लेटफार्म पर सेल करती हैं। यह बैग वह कोलकाता से कस्टमाइज कराती हैं। जिससे उन्हें डिलीवरी के लिए ज्यादा चार्ज देना पड़ रहा है। अब वह एनसीआर में ही अपने आइटम मैन्यूफैक्चरिंग कराने के लिए योजना बना रही हैं।
छात्राओं का उद्देश्य एक बड़ा बिजनेस स्थापित करना ही नहीं देश और दुनिया में लोगों को सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान और पर्यावरण प्रदूषण के प्रति जागरूक करना है। अपने स्कूल से वह इस मुहिम की शुरुआत कर चुकी हैं और अन्य विद्यालयों में भी वह वेबीनार आदि का आयोजन कर विद्यार्थियों को अपने विद्यालय परिसर व घर को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त करने के लिए जागरूक कर रही हैं। उनका कहना है कि वह आगे लगातार अपने शहर के और फिर अन्य जिले एवं प्रदेश के विद्यालयों में जागरूकता अभियान चलाएंगी।




