सोशल मीडिया पर सरकारी आलोचना के लिए कोड भाषा अपनाने की अपील, कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संस्थापक ने जारी किया वीडियो
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) अपने फॉलोअर्स को सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए नए 'कोडवर्ड' तरीके सिखा रही है।

नई दिल्ली,एजेंसी। सोशल मीडिया पर सरकार और उसके मंत्रियों की आलोचना करने वाली पोस्ट, वीडियो और रील को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अपने समर्थकों को कोड भाषा का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। संगठन के सह-संस्थापक आशुतोष रांका ने एक वीडियो जारी कर दावा किया कि पोस्ट या वीडियो में प्रधानमंत्री अथवा मंत्रियों का सीधा नाम लेने पर सामग्री को सामाजिक माध्यमों के एल्गोरिदम के जरिए हटाया जा सकता है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आशुतोष रांका ने अपने वीडियो में कहा कि देश में विरोध प्रदर्शनों और आवाजाही पर पाबंदियों के बाद अब सामाजिक माध्यमों पर भी नियंत्रण की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने आशंका जताई कि सरकार की आलोचना करने वाले वीडियो हटाए जा सकते हैं और खातों को बंद कराया जा सकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने समर्थकों से सीधे नाम लेने के बजाय सांकेतिक शब्दों और कोड भाषा में अपनी बात रखने की अपील की।
रांका ने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं के नाम के स्थान पर कुछ विशेष संकेतों या शब्दों का इस्तेमाल किया जाए, ताकि सामाजिक माध्यमों के एल्गोरिदम की पकड़ से बचा जा सके। उन्होंने गंभीर मुद्दों पर व्यंग्य और हास्य के माध्यम से अपनी बात रखने की सलाह भी दी। उनका कहना था कि कुछ वीडियो हटाए जाने या खाते बंद होने के बावजूद लोगों को अपनी बात रखना जारी रखना चाहिए।
अपने संदेश में रांका ने जर्मनी के 1945 के दौर और भारत के 1935 के समय का उदाहरण देते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्ता से सवाल पूछने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाने पड़ते हैं। उन्होंने समर्थकों से लगातार सक्रिय रहने और अपनी आवाज बुलंद रखने का आह्वान किया।
यह मामला सामाजिक माध्यमों पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सामग्री हटाने की प्रक्रिया और मंचों के एल्गोरिदम की भूमिका को लेकर बहस के बीच सामने आया है। हालांकि, किसी पोस्ट या वीडियो में नेताओं का नाम लेने मात्र से उसके हटाए जाने का दावा सत्यापित नहीं है। सोशल मीडिया मंचों पर सामग्री हटाने की कार्रवाई उनके नियमों और संबंधित नीतियों के आधार पर होती है।




