दिल्ली की जिला अदालतों में 3.02 लाख मुकदमे लंबित, 216 अभियोजन पद खाली

दिल्ली की जिला अदालतों में 3 लाख से अधिक मुकदमे लंबित हैं और अभियोजन निदेशालय में 216 पद खाली हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया धीमी हो रही है। एलजी तरनजीत सिंह संधू ने समीक्षा बैठक की और कई निर्देश दिए हैं।

नई दिल्ली। दिल्ली की जिला अदालतों में 3,02,477 मुकदमों के लंबित होने और अभियोजन निदेशालय में बड़ी संख्या में पद रिक्त रहने से न्यायिक प्रक्रिया की गति को लेकर चिंता सामने आई है। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने सोमवार को अभियोजन निदेशालय के कामकाज की समीक्षा करते हुए अनावश्यक तारीखों पर रोक, गवाहों की समय पर पेशी और मुकदमों के निपटारे में होने वाली देरी की नियमित निगरानी के निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक में सामने आया कि 30 सितंबर 2026 तक दिल्ली की जिला अदालतों में कुल 3,02,477 विचाराधीन मुकदमे लंबित थे। इनमें 2,54,597 मामले मजिस्ट्रेट अदालतों और 47,880 मामले सत्र अदालतों में लंबित हैं। उपराज्यपाल ने कम दोषसिद्धि दर, मुकदमों के धीमे निपटारे और लंबित मामलों की संख्या बढ़ने पर चिंता जताते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत निर्धारित समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में अभियोजन अधिकारियों पर बढ़ते कार्यभार का मुद्दा भी सामने आया। सत्र अदालतों में तैनात 155 लोक अभियोजक और अतिरिक्त लोक अभियोजक औसतन 309 लंबित मामलों का काम संभाल रहे हैं। रोहिणी में यह औसत 627 मामलों तक पहुंच गया है। वहीं, मजिस्ट्रेट अदालतों में तैनात 126 अतिरिक्त लोक अभियोजक और सहायक लोक अभियोजक औसतन 2,021 लंबित मामलों से जुड़े हैं। रोहिणी में एक अभियोजक के जिम्मे औसतन 3,065 लंबित मामले बताए गए।
अभियोजन निदेशालय में लोक अभियोजक, अतिरिक्त लोक अभियोजक और सहायक लोक अभियोजक के कुल 507 स्वीकृत पदों में से 216 पद रिक्त हैं। इसके अलावा सहायक कर्मचारियों के 71 स्वीकृत पदों में से 42 पद खाली हैं। उपराज्यपाल ने भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने और अदालतों में पर्याप्त कक्ष व अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने इस संबंध में संबंधित विभागों के साथ समन्वय करने की बात कही।
उपराज्यपाल ने अभियोजन पक्ष को आरोपपत्रों और साक्ष्यों की गहन जांच करने तथा जांच अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन मामलों में आरोपित दोषमुक्त होते हैं, उनका विश्लेषण कर जांच और अभियोजन में मौजूद कमियों की पहचान की जाए तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
बैठक में यह भी बताया गया कि आपराधिक मामलों में दोषमुक्ति के आदेशों की समीक्षा के लिए गठित स्थायी समिति अगस्त 2014 से अब तक 34 बैठकों में 64,210 मामलों पर विचार कर चुकी है। उपराज्यपाल ने अभियोजन, दिल्ली पुलिस और फोरेंसिक प्रयोगशालाओं के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि मुकदमों में अनावश्यक देरी रोकना और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाना प्राथमिकता होनी चाहिए।

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