यमुना बाजार घाट पर बेदखली का खतरा गहराया, 300 से अधिक परिवारों पर बुलडोजर की आशंका

डीडीए और डीडीएमए के नोटिस के बाद कश्मीरी गेट स्थित यमुना बाजार घाटों को पंडों ने खाली करना शुरू कर दिया है, क्योंकि 'ओ' जोन में आ रही इस बसावट को जल्द ही गिराया जा सकता है। हालांकि, यहां मौजूद 50 से अधिक मंदिरों के भविष्य को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है।

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक यमुना बाजार घाट इलाके में रहने वाले 300 से अधिक परिवारों के सामने बेघर होने का संकट गहरा गया है। दरअसल, प्रशासन की ओर से मकान खाली करने के लिए दिया गया अल्टीमेटम का समय समाप्त हो चुका है, जिसके बाद इलाके में कभी भी ध्वस्तीकरण अभियान चलाया जा सकता है. यमुना के खादर क्षेत्र व ओ-ज़ोन में स्थित इस बस्ती को खाली कराने की कार्रवाई अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है। ऐसे में यहां रहने वाले सैकड़ों परिवारों के बीच भय व अनिश्चितता का माहौल है।
डीडीए तथा डीडीएमए के नोटिस के बाद कश्मीरी गेट स्थित यमुना बाजार घाटों को पंडों ने खाली करना शुरू कर दिया है। घरों से सामान लेकर वह जाने लगे हैं। यमुना किनारे होने के चलते ‘ओ’ जोन में आ रही इस बसावट को इस सप्ताह कभी भी गिराने की कार्रवाई आरंभ हो सकती है। हालांकि, यहां मौजूद 50 से अधिक मंदिरों को लेकर अभी संशय है। पिछले माह ही 300 से अधिक परिवारों को घर खाली करने के लिए जारी नोटिस की मियाद इस माह के आरंभ में पूरी हो गई थी। इस बीच, पंडों ने हाई कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली।
स्थानीय लोगों के अनुसार, हाल ही में जिला प्रशासन ने बताया कि अवैध घोषित मकानों को गिराने की कार्रवाई कभी भी आरंभ हो सकती है। ऐसे में उन्होंने खुद से घरों को खाली करना शुरू कर दिया है। पंडों का परिवार, मछुआरे, बाल बनाने वाले व किरायेदार यहां से निकलकर वजीराबाद, कैलाश नगर और गीता कॉलोनी में रहने के लिए जा रहे हैं।
एक स्थानीय निवासी ने बताया कि एक दो दिन में यह क्षेत्र पूरी तरह से खाली हो जाएगा। वैसे, घाट स्थित मंदिरों के भविष्य को लेकर संशय है। क्योंकि, अभी स्पष्ट नहीं है कि मंदिरों को भी हटाया जाएगा अथवा नहीं। साथ ही अगर मंदिर छोड़ दिए जाते हैं तो फिर प्रतिदिन पूजा, अर्चना कर भोग कैसे लगेगा। साथ ही प्रतिदिन दिल्ली समेत दूसरे राज्यों से अनुष्ठान के लिए आने वाले भक्तों का क्या होगा।
वैसे, यहां बसावट को तोड़ना आसान नहीं है क्योकि, एक तरफ घाट तो दूसरी तरफ मोटी ऊंची दीवार है। वहीं एक तरफ निगमबोध घाट है। ऐसे में घाट नंबर दो से बुलडोजर प्रवेश कर सकेंगे। बताया जा रहा है कि पहले घाट की ओर की बसावट को तोड़कर रास्ता बनाया जाएगा। फिर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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