मुख्यमंत्री की रीलबाजी से बचने की नसीहत के बीच नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी का वीडियो वायरल, दो उपनिरीक्षक भी दिखे साथ
नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी इंदु प्रकाश का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। ओएसडी इंदु प्रकाश नोएडा पुलिस के दो उपनिरीक्षकों के साथ रैंप वॉक करते हुए नजर आ रहे है।

नोएडा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से सरकारी अधिकारियों को सोशल मीडिया पर रील बनाने से बचने और जनसेवा पर ध्यान केंद्रित करने की नसीहत के बीच नोएडा प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) इंदु प्रकाश का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। वायरल वीडियो में वह नोएडा पुलिस के दो उपनिरीक्षकों के साथ रैंप वॉक करते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक कार्यशैली और सरकारी कार्यालयों में इस तरह की गतिविधियों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
आरोप है कि यह वीडियो नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय परिसर में बनाया गया है। हालांकि, वीडियो कब और किस अवसर पर शूट किया गया, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि इसका किसी सरकारी या सांस्कृतिक कार्यक्रम से संबंध था या नहीं। ऐसे में वीडियो की पृष्ठभूमि और शूटिंग के उद्देश्य को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
वीडियो को लेकर आलोचकों का कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा अधिकारियों को सोशल मीडिया पर रीलबाजी से दूर रहने और अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान देने का संदेश दिए जाने के बाद इस तरह की गतिविधियां प्रशासनिक गंभीरता पर सवाल खड़े करती हैं। उनका तर्क है कि सरकारी कार्यालयों का उपयोग मुख्य रूप से जनसुविधाओं और प्रशासनिक कार्यों के लिए होना चाहिए। वहीं, कुछ लोग इसे व्यक्तिगत या सांस्कृतिक गतिविधि बताते हुए बिना पूरी जानकारी के विवाद खड़ा करने को उचित नहीं मान रहे हैं।
इंदु प्रकाश सेवानिवृत्ति के बाद प्रदेश सरकार की ओर से दिए गए सेवा विस्तार के तहत नोएडा प्राधिकरण में कार्यरत हैं। वह प्राधिकरण के विभिन्न कार्यों की निगरानी से जुड़े रहे हैं। सफाई व्यवस्था, अतिक्रमण हटाने, मेट्रो यात्रियों की सुविधाओं और वाणिज्यिक कियोस्क आवंटन जैसे विषयों पर भी वह प्राधिकरण की ओर से बयान देते रहे हैं।
फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर ओएसडी इंदु प्रकाश, नोएडा प्राधिकरण और पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वीडियो की वास्तविक पृष्ठभूमि और कार्यालय परिसर में इसकी शूटिंग की पुष्टि होने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




