परंपरा और आधुनिकता के नृत्य संगम से सजा ‘आह्वान-2026’, राजा आनंद के निर्देशन में आठ प्रस्तुतियों ने बांधा समां

दो दिवसीय भारतीय समकालीन नृत्य महोत्सव में कथक, कथकली, लोक और प्रायोगिक नृत्य शैलियों का दिखा अनूठा संगम; देश के प्रतिष्ठित कोरियोग्राफरों और नृत्य समूहों ने बिखेरा कला का जादू

राजू बोहरा / विशेष संवाददाता

नई दिल्ली। भारतीय सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक नृत्य शैलियों और आधुनिक कलात्मक अभिव्यक्तियों को एक मंच पर लाने वाला दो दिवसीय भारतीय समकालीन नृत्य महोत्सव ‘आह्वान-2026’ चाणक्यपुरी स्थित सिविल सर्विसेज ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट सभागार में 24 और 25 अक्टूबर को भव्य रूप से संपन्न हुआ। स्पेस परफॉर्मिंग आर्ट्स की ओर से आयोजित इस महोत्सव का निर्देशन प्रसिद्ध कला निर्देशक एवं कोरियोग्राफर राजा आनंद ने किया। ‘अनुष्ठान-जहां संस्कृतियां मिलती हैं’ विषय पर आधारित इस आयोजन में देश के जाने-माने कोरियोग्राफरों और नृत्य समूहों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविधता और नृत्य की रचनात्मक शक्ति को दर्शाया।
महोत्सव के दोनों दिनों में कुल आठ विशेष नृत्य प्रस्तुतियां हुईं। पहले दिन समकालीन एवं प्रायोगिक नृत्य शैलियों के माध्यम से नए विचारों और प्रयोगों को मंच मिला, जबकि दूसरे दिन कथक, कथकली और लोक परंपराओं से जुड़ी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया। इन प्रस्तुतियों में पारंपरिक भाव-भंगिमाओं के साथ आधुनिक नृत्य तकनीकों और प्रभावशाली मंच संयोजन की झलक देखने को मिली।

पहले दिन समकालीन और प्रायोगिक नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियां

24 अक्टूबर को महोत्सव की शुरुआत साई कृपा एनजीओ के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत ‘गुरु वंदना’ से हुई। इसके बाद राजा आनंद के कोरियोग्राफी निर्देशन में स्पेस परफॉर्मिंग आर्ट्स के समूह ने ‘शून्य से अनंत तक’ (From Zero to Infinity) प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति में विचारों और भावनाओं की रचनात्मक अभिव्यक्ति के जरिए दर्शकों के सामने एक अलग कलात्मक अनुभव रखा गया।

इसके बाद वैशाली शर्मा और भूमिका के कोरियोग्राफी निर्देशन में सुमंगलम नृत्यशाला ने ‘परंपरा प्रवाह’ (Tradition Flow) प्रस्तुत कर भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं की निरंतरता को नृत्य के माध्यम से दर्शाया। पारोमिता वोइ और निखिल बोहरा के निर्देशन में आराध्या आर्टिस्ट कलेक्टिव की प्रस्तुति ‘अश्रुहा? (A Question in Red)’ ने अपनी प्रयोगात्मक शैली से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। पहले दिन की अंतिम प्रस्तुति आकाश कुमार एवं उनकी टीम की नृत्य नाटिका ‘एकलव्य’ रही, जिसके माध्यम से गुरु-शिष्य परंपरा और समर्पण की भावना को मंच पर उकेरा गया।

दूसरे दिन कथक, कथकली और लोक नृत्यों की रही छटा

25 अक्टूबर को दूसरे दिन की प्रस्तुतियों में भारतीय शास्त्रीय और पारंपरिक नृत्य शैलियों की विविधता देखने को मिली। गुरु वी. जगादीसन थिरुवत्तर के कोरियोग्राफी निर्देशन में थिरुवत्तर जगादीसन एंड टीम ने ‘दाशनान वधम्’ (Dussasana Vadham) प्रस्तुत किया। इसके बाद आफिया शर्मा और आहाना कपूर के निर्देशन में तन्वा क्रिएटिव डांस एन्सेम्बल ने ‘लकीर’ (Lakeer) के माध्यम से समकालीन नृत्य की प्रभावशाली अभिव्यक्ति पेश की।

सुप्रिया मेहरा के कोरियोग्राफी निर्देशन में त्रिवेणी, तरंगिणी आर्ट्स की प्रस्तुति ‘त्रिशिखा’ (Trishikha) ने दर्शकों को आकर्षित किया। वहीं राहुल रे और निशा रे के निर्देशन में अटोरियम फाउंडेशन ने ‘द सेक्रेड स्मोक’ (The Sacred Smoke) प्रस्तुत कर दूसरे दिन के कार्यक्रम को कलात्मक ऊंचाई प्रदान की। सभी प्रस्तुतियों में कलाकारों की मेहनत, सामूहिक तालमेल और भावाभिव्यक्ति स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

कला एवं संस्कृति जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों की रही मौजूदगी

महोत्सव में गुरु बी. जगादीसन, गुरु संतोष नायर और गुरु किशोर शर्मा सहित कला एवं संस्कृति जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित रहीं। दूसरे दिन भारती कुक्कल, अंजिना राजगोपाल और सुमन डूंगा ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। विदेश मंत्रालय की संयुक्त सचिव एवं भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) की उपमहानिदेशक मनीषा स्वामी की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई।

कार्यक्रम के तकनीकी पक्ष में प्रकाश व्यवस्था की जिम्मेदारी हिमांशु बी. जोशी ने संभाली, जबकि टीना रवींद्रन ने उद्घोषणा के माध्यम से कार्यक्रम का संचालन किया। दोनों दिनों की प्रस्तुतियों में मंच सज्जा, प्रकाश संयोजन और उद्घोषणा ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

परंपरा और आधुनिकता के बीच सांस्कृतिक संवाद की पहल

स्पेस परफॉर्मिंग आर्ट्स द्वारा सिविल सर्विसेज ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट और आर्ट्स नॉर्वे के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव में दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क रखा गया था। ‘आह्वान-2026’ का उद्देश्य नृत्य के माध्यम से विभिन्न संस्कृतियों, परंपराओं और विचारों को जोड़ना तथा युवा एवं उभरते कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देना रहा।

दो दिनों तक चलीं आठ विविध प्रस्तुतियों ने यह दर्शाया कि नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, विचार, संवेदना और सामाजिक जुड़ाव की प्रभावशाली अभिव्यक्ति भी है। राजा आनंद के निर्देशन में आयोजित ‘आह्वान-2026’ ने भारतीय पारंपरिक नृत्य विरासत और समकालीन कलात्मक प्रयोगों के बीच एक सार्थक मंच तैयार किया।

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