‘नई पीढ़ी की सोच अलग है, इसका मतलब यह नहीं कि वह गलत है’: पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे

पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (रि.) ने जेन जेड द्वारा सत्ता परिवर्तन को लेकर दिए गए हालिया बयानों पर अपनी राय रखी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन विचारों को पूरी तरह खारिज करने के बजाय, इनके साथ रचनात्मक तरीके से जुड़ने की जरूरत है।

पुणे,महाराष्ट्र। पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (सेवानिवृत्त) ने नई पीढ़ी के नजरिए और उसकी सोच को समझने के लिए संवाद को जरूरी बताया है। पुणे में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी का सोचने का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वह गलत है।
जनरल नरवणे ने कहा, “हर पीढ़ी अलग होती है। नई पीढ़ी का चीजों को देखने का अपना नजरिया होता है, जो हमेशा आपकी सोच से मेल नहीं खाता। इसका मतलब यह नहीं कि वे गलत हैं। आपको यह समझना होगा कि उन्हें क्या प्रेरित करता है और उस ऊर्जा का सही इस्तेमाल करना होगा।”
उन्होंने कहा कि युवाओं की बात को केवल अलग नजरिए के कारण खारिज नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, नई पीढ़ी भी देश का नुकसान नहीं चाहती और उसका मानना है कि वह जो कर रही है, वह बेहतर और अच्छे उद्देश्य के लिए है। उन्होंने कहा, “आइए, उन्हें समझने की कोशिश करते हैं।”
पूर्व सेना प्रमुख ने युवाओं की समस्याओं और उलझनों को समझने के लिए एक-दूसरे की बात सुनने तथा लगातार बातचीत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “जब हम उन्हें समझ लेंगे, उनकी समस्याओं और कठिनाइयों को जान लेंगे, तभी हम उनके सामने आ रही उलझनों और मुद्दों को सुलझा सकेंगे। इसलिए एक-दूसरे से बातचीत करना और एक-दूसरे की बात सुनना बहुत जरूरी है।”
जनरल नरवणे की यह टिप्पणी युवाओं के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और उन्हें लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच आई है। इन प्रदर्शनों में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की ओर से चुनाव आयोग के समक्ष विभिन्न मांगें भी रखी गई हैं।
इन प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक दलों और नेताओं की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया है कि विपक्षी दल युवाओं के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों का इस्तेमाल अराजकता फैलाने और सरकार बदलने के प्रयास के लिए कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी प्रदर्शनों को लेकर इसी तरह की आशंकाएं जताई हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने ‘सत्ता परिवर्तन’ की चर्चा पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
वर्ष 2019 से 2022 तक थलसेना प्रमुख रहे जनरल नरवणे इससे पहले भी पीढ़ियों के बीच संवाद और बदलती सोच को समझने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं। उनकी ताजा टिप्पणी में भी युवाओं की शिकायतों और विचारों को समझने तथा बातचीत के जरिए उनके मुद्दों का समाधान तलाशने पर जोर दिया गया है।

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