एनसीईआरटी की नई किताबों में बदलाव: न्यायपालिका को बताया ‘निष्पक्ष’, चुनाव प्रक्रिया व महिलाओं की भूमिका पर जोर

एनसीईआरटी की नई पाठ्यपुस्तकों में नए विषय शामिल किए जाने और विवादित मुद्दों के समाधान के प्रयास शुरू हो गए हैं।

नई दिल्ली/एजेंसी। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की नई पाठ्यपुस्तकों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। 8वीं कक्षा की पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े विवाद के बाद अब 9वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की नई किताब में न्यायपालिका को “निष्पक्ष और स्वतंत्र संस्था” के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसे नागरिकों के अधिकारों का रक्षक बताया गया है।
नए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे के अनुरूप तैयार की गई इस पुस्तक में न्यायपालिका के विभिन्न कार्यों का विस्तृत उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि न्यायपालिका कार्यपालिका के निर्णयों और संविधान संशोधनों की समीक्षा करती है, असंवैधानिक कानूनों को निरस्त कर सकती है और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ समाज के सभी वर्गों के अधिकारों की रक्षा में अहम भूमिका निभाती है।
“शक्ति का पृथक्करण” शीर्षक वाले अध्याय में जनहित याचिकाओं (पीआईएल) के माध्यम से सभी नागरिकों को न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने की प्रक्रिया को भी समझाया गया है। इसके साथ ही, पुस्तक में भारत की चुनावी प्रक्रिया के व्यापक पैमाने और चुनाव आयोग की भूमिका को प्रमुखता से दर्शाया गया है।
नई पुस्तक में विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) की प्रक्रिया को भी शामिल किया गया है, जिसके तहत यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो। इसमें चुनाव आयोग की सराहना करते हुए कहा गया है कि उसने फर्जी खबरों, गलत सूचनाओं और धमकियों जैसी चुनौतियों के बावजूद निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराए हैं।
गौरतलब है कि फरवरी में एनसीईआरटी की 8वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” से संबंधित एक खंड को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उस पुस्तक की प्रतियां वापस ले ली गई थीं और एनसीईआरटी ने माफी भी मांगी थी।
नई पाठ्यपुस्तक में प्राचीन भारतीय समाज और महिलाओं की स्थिति पर भी प्रकाश डाला गया है। “राज्य और समाज एक हजार ईसवीं तक” शीर्षक अध्याय में वैदिक काल को महिलाओं के सम्मान और उच्च सामाजिक स्थिति का काल बताया गया है। इसमें ‘मनुस्मृति’ का एक श्लोक भी शामिल किया गया है, जिसमें कहा गया है कि जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां देवता प्रसन्न रहते हैं।
पुस्तक में यह भी उल्लेख किया गया है कि वैदिक काल में महिलाएं शिक्षा प्राप्त करती थीं, अनुष्ठानों में भाग लेती थीं और सार्वजनिक सभाओं में भी सक्रिय रहती थीं। ऋग्वेद के कई सूक्तों को अपाला, विश्ववारा, घोषा और लोपामुद्रा जैसी महिला ऋषियों से भी जोड़ा गया है। एनसीईआरटी की इन नई पाठ्यपुस्तकों को शिक्षा प्रणाली में संतुलित और व्यापक दृष्टिकोण देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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