कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच संपन्न हुई नीट-यूजी परीक्षा, 20 लाख से अधिक छात्रों ने लिया भाग

देशभर में नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा रविवार को कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हुई, जिसमें 20 लाख से अधिक छात्रों ने डॉक्टर बनने के सपने के साथ भाग लिया।

नई दिल्ली। मेडिकल स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित नीट-यूजी परीक्षा रविवार को देशभर में कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) और शिक्षा मंत्रालय के लिए राहत की बात यह रही कि परीक्षा के दौरान कहीं से किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की सूचना नहीं मिली। इस परीक्षा में 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया और उनका डॉक्टर बनने का सपना ओएमआर शीट में दर्ज हो गया।
यह परीक्षा पारंपरिक पेन-पेपर मोड में आयोजित की गई, हालांकि एनटीए ने अगले वर्ष से इसे कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) के रूप में कराने का निर्णय लिया है। इससे पहले तीन मई को आयोजित परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के चलते रद्द कर दिया गया था, जिसकी जांच फिलहाल सीबीआई द्वारा की जा रही है।
एनटीए के अनुसार, परीक्षा देश के 551 शहरों में स्थापित 5440 केंद्रों तथा विदेश के 14 शहरों में एक साथ आयोजित की गई। परीक्षा के सफल आयोजन के लिए केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों और केंद्रीय एजेंसियों ने पिछले 37 दिनों में समन्वित रूप से कार्य किया। एजेंसी ने दावा किया कि सभी केंद्रों पर निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत परीक्षा कराई गई और प्रश्नपत्रों के साथ-साथ ओएमआर शीट की सुरक्षा के लिए भारतीय वायु सेना और डाक विभाग की मदद ली गई।
परीक्षा माफिया की सक्रियता और दुष्प्रचार को देखते हुए इस बार सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर स्थानीय पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी, जबकि हर शहर में साइबर कमांडो भी सक्रिय रहे। परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी सहित 13 भारतीय भाषाओं में आयोजित की गई और इस पर केंद्रीय एजेंसियों के साथ-साथ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी नजर रखी।
परीक्षा के दौरान एनटीए मुख्यालय में बनाए गए कंट्रोल रूम से सीसीटीवी के जरिए निगरानी की गई। इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित एक कथित पेपर लीक वीडियो को एनटीए ने फर्जी बताते हुए ऐसे भ्रामक सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
इस बार अभ्यर्थियों को 15 मिनट का अतिरिक्त समय भी दिया गया, जिससे वे कागजी औपचारिकताओं को पूरा कर सकें। दोपहर दो बजे शुरू हुई परीक्षा शाम 5 बजकर 15 मिनट पर समाप्त हुई। परीक्षा के दौरान दिव्यांग और अस्वस्थ छात्रों के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए, जिससे कोई भी छात्र परीक्षा से वंचित न रहे।
सुरक्षा के तहत अभ्यर्थियों को त्रिस्तरीय जांच के बाद ही परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया गया। देशभर में सात लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी और अधिकारी तैनात रहे। 95 हजार परीक्षा कक्षों की निगरानी के लिए 1.38 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए और इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी रोकने के लिए 53 हजार से अधिक जैमर स्थापित किए गए।
एनटीए ने परीक्षा के सफल आयोजन के लिए इसे ‘टीम भारत’ के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताते हुए विभिन्न मंत्रालयों, एजेंसियों और बैंकिंग संस्थानों के सहयोग की सराहना की। एजेंसी के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा कि इस बार परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित रही और प्रश्नपत्र लीक की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई।
इस बीच, परीक्षा के दौरान छात्रों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संवेदनशीलता दिखाते हुए दिल्ली हवाई अड्डे पर करीब 45 मिनट तक रुककर अपने आवास के लिए प्रस्थान किया, ताकि उनके आवागमन से उत्पन्न संभावित ट्रैफिक जाम के कारण परीक्षार्थियों को परेशानी न हो।
आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा में अनुपस्थित भी रहे। विशेषज्ञों के मुताबिक, परीक्षा रद्द होने के बाद तैयारी के लिए कम समय मिलना और अन्य विकल्पों की ओर रुख करना इसके प्रमुख कारण रहे।

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