दिल्ली पुलिस के एसआई ने खुद मांगा डिमोशन, वजह जानने के बाद एसआई को बनाया गया सिपाही
दिल्ली के करावल नगर पुलिस स्टेशन में तैनात दिल्ली पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर ने स्वेच्छा से खुद के डिमोशन की अर्जी डाली है। उन्होंने इसके पीछे की वजह भी बताई है। उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस प्रशासन ने उनका अनुरोध स्वीकार कर लिया है और उन्हें कांस्टेबल पद पर पुनः पदावनति करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। एसआई का यह अजीबो गरीब फैसला पूरे पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है।

दिल्ली ब्यूरो। उत्तर पुर्वी दिल्ली जिले के करावल नगर थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर मनीष का सीनियर अधिकारियों ने प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया है। अब फिर से उन्हें कॉन्स्टेबल बना दिया गया है। उन्होंने यह डिमोशन अपनी मर्जी से कराया है, क्योंकि मनीष बड़े पद की तैयारी करना चाहते हैं। पुलिस सूत्रों के मुताविक, मनीष बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। इसके कुमार 2018 में दिल्ली पुलिस में बाद भी वो लगातार विभिन्न तरह के एग्जाम की तैयारी करते रहे।
नतीजतन 2023 में उन्होंने दिल्ली पुलिस से एसआई का एग्जाम क्लियर कर लिया। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें बतौर ट्रेनी एसआई नॉर्थ ईस्ट जिले के करावल नगर थाने में काम करने के लिए भेजा गया। दरअसल सीपी सतीश गोलछा ने ट्रांसफर-पोस्टिंग की नई गाइडलाइंस जारी की है, जिसके मुताबिक नए सब इंस्पेक्टरों के लिए सर्विस के शुरुआती छह साल जिलों के तहत आने वाले थानों में काम करना अनिवार्य है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि मनीष सीनियर अफसरों के सामने पेश हुए थे। वह स्टाफ सिलेक्शन कमिशन (एसएससी) के कंबाइंड ग्रैजुएट लेवल (सीजीएल) के एग्जाम की तैयारी करना चाहते हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक उनका कहना है कि जब वह कॉन्स्टेबल थे तब पढ़ाई के लिए समय निकाल लेते थे। लेकिन थाने में तैनाती की वजह से पढ़ने के लिए वक्त नहीं मिल पाता है।
इसलिए उन्होंने सीनियर अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर लिखा था कि उन्हें कॉन्स्टेबल के पद पर ही दोबारा वापस भेज दिया जाए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक डीसीपी ने उनका प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया और फिर से कॉन्स्टेबल बना दिया। हालांकि इस कार्रवाई से पहले पुलिस मुख्यालय ने यह भी सुनिश्चित किया कि मनीष के खिलाफ कोई विभागीय जांच, आपराधिक या विजिलेंस मामला तो लंबित नहीं है।
एसआई और कॉन्स्टेबल का क्या होता है काम
एसआई और कॉन्स्टेबल पुलिस विभाग मे कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करते है। एसआई (दारोगा) थाना स्तर पर जांच और प्रबंधन सभालते है, जबकि कॉन्स्टेबल ग्राउंड लेवल पर गश्त, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा ड्यूटी करते है। एसआई के पास चार्जशीट दाखिल करने का अधिकार होता है जो कॉन्स्टेबल के पास नहीं होता। एसआई पर मामलों के जांच की जिम्मेदारी होती है। इस हिसाब से कॉन्स्टेबल पर काफी कम जिम्मेदारी होती है।




