अलीगंज अग्निकांड के बाद कार्रवाई तेज: अवैध कॉम्प्लेक्स पर 7 जुलाई को चलेगा बुलडोजर
अलीगंज के अवैध कॉम्प्लेक्स, जहां आग लगने से 15 लोगों की मौत हुई थी, उसे एलडीए 7 जुलाई को ध्वस्त करेगा।

लखनऊ/एजेंसी। अलीगंज क्षेत्र में अवैध कॉम्प्लेक्स में हुए भीषण अग्निकांड के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार को लगी आग में 15 लोगों की मौत के बाद अब एलडीए ने संबंधित अवैध कॉम्प्लेक्स को ध्वस्त करने की तैयारी कर ली है। इस संबंध में सात जुलाई को भवन पर बुलडोजर चलाने का निर्णय लिया गया है।
बुधवार सुबह एलडीए की पांच सदस्यीय जांच समिति मौके पर पहुंची और पूरे परिसर का निरीक्षण किया। अग्निकांड से संबंधित फोटो सहित एक नया नोटिस भी भवन पर चस्पा किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, 23 जून को जारी नोटिस की समय सीमा सात जुलाई को समाप्त होगी, जिसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
जांच में सामने आया है कि 185 वर्गमीटर के आवासीय भूखंड पर स्वीकृत मानचित्र का उल्लंघन करते हुए बेसमेंट से लेकर तीसरी मंजिल तक अवैध निर्माण कर पिछले करीब 10 वर्षों से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। इस संबंध में एलडीए को कोई वैध अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। विहित प्राधिकारी अजीत कुमार की ओर से जारी नोटिस में 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
अलीगंज के सेक्टर डी स्थित एमएस/102 भवन की जांच के बाद एलडीए को वीरेंद्र प्रसाद शुक्ल और सुरेंद्र प्रसाद शुक्ल की एक अन्य संपत्ति का भी पता चला है, जहां छह माह पूर्व भी आग लग चुकी है। इस भवन के बेसमेंट से लेकर तीन मंजिल तक व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। एलडीए इस संपत्ति के दस्तावेज भी खंगाल रहा है और शुक्रवार तक नोटिस चस्पा करने की तैयारी है।
ध्वस्तीकरण के दौरान किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए अधिकारियों ने क्षेत्र का निरीक्षण किया। मुख्य अभियंता ने ध्वस्तीकरण की रणनीति तय की, जबकि विद्युत एवं यांत्रिक विभाग ने बिजली आपूर्ति बंद करने समेत अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
एलडीए की आंतरिक जांच टीम ने शासन द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) के समक्ष भी अपना पक्ष रखा। एसआईटी ने वर्ष 2016 में जारी ध्वस्तीकरण नोटिस को निरस्त किए जाने पर सवाल उठाए। इस पर टीम ने बताया कि उस समय व्यावसायिक उपयोग का स्पष्ट खाका न होने के कारण शपथ पत्र के आधार पर आदेश वापस लिया गया था।
साथ ही यह भी सवाल उठा कि स्वीकृत मानचित्र के बावजूद अतिरिक्त निर्माण कैसे किया गया। इस पर एलडीए टीम ने बताया कि उस समय संबंधित अधिकारियों के पास अतिरिक्त जिम्मेदारियां थीं। मामले में पांच इंजीनियरों की जिम्मेदारी तय करते हुए सहायक और अवर अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
फिलहाल एलडीए अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए लगातार कार्रवाई कर रहा है और संबंधित अन्य संपत्तियों की भी जांच जारी है।




