दिल्ली पुलिस का ‘ऑपरेशन साइहॉक 5.0’ लॉन्च, साइबर अपराधियों पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ अब तक का सबसे व्यापक और लक्षित अभियान ‘ऑपरेशन साइहॉक 5.0’ शुरू किया है, जिसके तहत 16 जून से 18 जून 2026 के बीच देशव्यापी स्तर पर सघन कार्रवाई की गई। इस अभियान का उद्देश्य गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के सहयोग से चिन्हित हॉटस्पॉट्स पर कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के नेटवर्क को ध्वस्त करना था। 48 घंटे तक चले इस विशेष अभियान को दिल्ली के सभी 15 पुलिस जिलों के साथ-साथ रेलवे, मेट्रो, क्राइम ब्रांच और इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) इकाई ने संयुक्त रूप से अंजाम दिया। इस दौरान 715 रेडिंग टीमों में कुल 2,374 पुलिसकर्मी शामिल रहे। कार्रवाई का दायरा दिल्ली से बाहर 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक फैलाया गया, जो साइबर अपराध के खिलाफ एक समन्वित राष्ट्रीय प्रयास को दर्शाता है।
अभियान के दौरान कुल 7,189 लोगों को हिरासत में लिया गया या पकड़ा गया, जो साइहॉक श्रृंखला में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। इनमें से 916 आरोपियों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया, जबकि 691 लोगों को एहतियाती कार्रवाई के तहत बाउंड डाउन किया गया। 4,290 से अधिक लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। पुलिस ने 481 नए मामले दर्ज किए और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल से जुड़े 410 लंबित मामलों का भी निपटारा किया। इन मामलों में करीब 700 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का खुलासा हुआ है।
कार्रवाई के दौरान साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले बड़ी संख्या में डिजिटल और वित्तीय उपकरण भी जब्त किए गए, जिनमें 760 से अधिक मोबाइल फोन, 820 सिम कार्ड, 228 एटीएम कार्ड, 247 बैंक किट और पासबुक, 323 आधार कार्ड, 104 लैपटॉप और कंप्यूटर शामिल हैं। इसके अलावा 21.72 लाख रुपये नकद, एक लग्जरी एसयूवी और 11 पीओएस मशीनें भी बरामद की गईं। साइबर ठगी में संलिप्त दो नाइजीरियाई नागरिकों की पहचान कर उन्हें देश से निष्कासित किया गया।
इस अभियान में साइबर अपराध के पूरे इकोसिस्टम को निशाना बनाया गया, जिसमें म्यूल अकाउंट नेटवर्क और दुर्भावनापूर्ण मोबाइल एप्लीकेशन वितरित करने वाले गिरोह शामिल हैं। म्यूल अकाउंट्स के माध्यम से अपराधी अवैध धन का लेनदेन करते थे, और ऐसे 3,600 से अधिक लोगों की पहचान की गई।
पुलिस ने उन लोगों पर भी विशेष ध्यान दिया, जो फर्जी एंड्रॉयड एप्स के जरिए लोगों का डेटा चुराने और ओटीपी इंटरसेप्ट करने का काम करते हैं। ये एप्स अक्सर वैध सेवाओं के रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से फैलाए जाते हैं।
दिल्ली के भीतर संचालित कई फर्जी कॉल सेंटरों का भी भंडाफोड़ किया गया, जो नौकरी, बीमा और तकनीकी सहायता के नाम पर लोगों को ठग रहे थे। इन कॉल सेंटरों से जुड़े संचालकों, प्रबंधकों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन साइहॉक समय के साथ विकसित हुआ है और इस बार केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर साइबर अपराध के वित्तीय और तकनीकी ढांचे को ध्वस्त करने पर विशेष जोर दिया गया है। यह अभियान पूरी तरह इंटेलिजेंस आधारित और तकनीक संचालित था, जिससे अपराधियों के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना न रहे। पुलिस ने इस अभियान की सफलता में केंद्रीय एजेंसियों, बैंकों, टेलीकॉम कंपनियों और विशेष साइबर टीमों के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया है। साथ ही भविष्य में भी इस तरह के अभियान जारी रखने की बात कही है।
नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे सतर्क रहें, अपनी बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें, संदिग्ध लिंक या एप्लीकेशन से बचें, ग्राहक सेवा नंबर की पुष्टि करें और साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि सभी थानों में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं, ताकि शिकायतों का त्वरित समाधान हो सके और समय पर रिपोर्टिंग के जरिए ठगी की राशि की रिकवरी की संभावना बढ़ाई जा सके।




