भीषण गर्मी और लापरवाही से मयूर विहार की सूखी संजय झील, मरी मछलियों को गड्ढे में दबाया

भीषण गर्मी और जल बोर्ड की लापरवाही के कारण मयूर विहार की संजय झील सूख गई, जिससे बड़ी संख्या में मछलियां मर गईं। खबर छपने के बाद जल बोर्ड पानी की आपूर्ति बहाल करने की तैयारी है।

पूर्वी दिल्ली। दिल्ली में पड़ रही भीषण गर्मी से मयूर विहार स्थित डीडीए की संजय झील सूख गई है। इस कारण झील में पल रही काफी संख्या में मछलियां मर गईं। मछलियों के मरने की वजह गर्मी व झील में पानी न छोड़ना है। उन मछलियों को आवारा कुत्ते खा रहे थे। झील में आने वाले लोग इस मंजर को देखकर बेचेन हो रहे थे।
मीडिया में खबर छपने के बाद जल बोर्ड हरकत में आया। जल बोर्ड ने झील में मरी हुई मछलियों को एक गड्ढा खोदकर उसमें दबा दिया। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा बहुत छाया हुआ है। कई यूजर ने आरोप लगाया डीडीए व जल बोर्ड ने अपनी नकामी काे गड्ढे में ढकने की कोशिश की है।
संजय झील यमुनापार का इकलौता पिकनिक स्पाॅट है। झील में पानी का जिम्मा दिल्ली जल बोर्ड के पास है। झील में पानी कोंडली के एसटीपी प्लांट से आता है। आरोप है पिछले चार माह से पानी की सप्लाई बंद थी। अब भीषण गर्मी पड़ रही है। पानी की सप्लाई न होने व गर्मी से झील सूख गई। जागरण में खबर छपने के बाद शुक्रवार को यहां अधिकारी पहुंचे। झील में गड्ढा करवाया और मरी हुई मछलियों को उसमें दबवा दिया।
जब मीडिया ने अधिकारियों से सवाल करने की कोशिश की तो अधिकारी बचते हुए नजर आए और वहां से चलते बने। मरी हुई मछलियों की वजह से झील परिसर में दुर्गंध फैली हुई थी। लोग झील में आने से कतरा रहे थे। लोगों ने दैनिक जागरण का आभार जताते हुए कहा कि महीनों से दम तोड़ रही झील के पुनर्जीवित होने की उम्मीद फिर से जगी है।
उपेक्षा और बदइंतजामी के कारण पानी की किल्लत झेल रही यमुनापार की सबसे बड़ी झील में जल्द पानी की व्यवस्था किए जाने की तैयारी है। दैनिक जागरण की खबर के बाद हरकत में आए जलबोर्ड अधिकारियों ने झील में पानी आपूर्ति व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि कोंडली के एसटीपी प्लांट से आ रही पाइपलाइन में लिकेज के कारण झील तक पानी पहुंचाने में परेशानी आ रही थी।
इसे दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया गया है। सवाल यह है कि झील सूखती गई और जल बोर्ड को पाइपलाइन में लीकेज का जरा भी पता नहीं चला। झील एक दिन में सूखी नहीं होगी। अधिकारियों की गंभीर लापरवाही इस मामले में सामने आ रही है। वहीं उम्मीद जताई है कि एक सप्ताह में झील में पानी आना शुरू हो जाएगा।
झील की देखरेख का जिम्मा रखने वाले डीडीए और पानी प्रबंधन करने वाले जलबोर्ड के बीच सामंजस्य की कमी और लापरवाही के कारण झील आज अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। उनका कहना है कि बीते चार वर्षों से झील लगातार पानी के अभाव से जूझ रही है। इसके चलते परिसर की हरियाली खत्म होती जा रही है, पेड़-पौधे सूख रहे हैं और यहां आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या भी लगातार कम हो रही है।

Related Articles

Back to top button