शाहदरा थाने में हाईवोल्टेज ड्रामा,वकीलों और पुलिस में हुई भिड़ंत, एफआईआर दर्ज
शाहदरा थाने में वकीलों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। इनमें 15-20 वकीलों पर एसएचओ और एसीपी से बदसलूकी, गाली-गलौज व मारपीट की धमकी का आरोप है। एसीपी मनस्वी वशिष्ठ की शिकायत पर 26 अक्टूबर को मामला दर्ज किया गया।

पूर्वी दिल्ली। शाहदरा थाने में पुलिस अधिकारियों और वकीलों के बीच विवाद का मामला सामने आया है। पुलिस ने 15 से 20 वकीलों पर एसएचओ और एसीपी के साथ कथित बदसलूकी, गाली-गलौज तथा पुलिसकर्मियों को धमकी देने के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, घटना थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई है। सहायक पुलिस आयुक्त गांधी नगर मनस्वी वशिष्ठ की शिकायत पर 26 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज की गई।
पुलिस के मुताबिक, विवाद की शुरुआत 24 अक्टूबर को कड़कड़डूमा अदालत परिसर में हुई, जहां हेड कांस्टेबल अमित मलिक को कुछ वकीलों ने रोककर एक मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने को लेकर सवाल किए। इसके बाद उसी दिन दोपहर करीब ढाई बजे अधिवक्ता अमूल्य के साथ 15-20 वकील शाहदरा थाने पहुंचे। पुलिस का आरोप है कि वहां उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर आरोपियों से रिश्वत लेकर उन्हें छोड़ने का आरोप लगाया और अधिकारियों के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया।
पुलिस की शिकायत के अनुसार, स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब एक वकील ने एसएचओ का हाथ पकड़कर उन्हें खींचने का प्रयास किया। आरोप है कि कुछ वकीलों ने पुलिसकर्मियों को धमकाया और उनके साथ गाली-गलौज की। पुलिस ने घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज को जांच का हिस्सा बनाया है और पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जा रही है।
दूसरी ओर, वकीलों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वकीलों का कहना है कि शाहदरा थाने में दर्ज एक मामले में अधिवक्ता ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट आई थी और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर वे पुलिस से संपर्क कर रहे थे। अधिवक्ता अमूल्य रतन की शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज होने की बात सामने आई है।
बार समिति के अनुसार, 23 अक्टूबर को कुछ वकील इसी मामले को लेकर थाने पहुंचे थे। उनका दावा है कि उस समय सहायक पुलिस आयुक्त और थाना प्रभारी ने आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया था। हालांकि, अगले दिन वकीलों को जानकारी मिली कि संदिग्धों को गिरफ्तार किए बिना ही छोड़ दिया गया। इसके बाद वकील दोबारा थाने पहुंचे और विवाद बढ़ गया।
वकीलों की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने कथित तौर पर रिवॉल्वर दिखाकर उन्हें धमकाया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने भी अपने स्तर पर लगाए गए आरोपों की जांच की बात कही है।
विवाद के बाद दिल्ली की जिला अदालतों में वकीलों के बीच भी आक्रोश देखने को मिला। वकीलों की एक समिति ने सोमवार को प्रस्ताव पारित कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। समिति ने जांच पूरी होने तक सहायक पुलिस आयुक्त मनस्वी वशिष्ठ और संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ निलंबन सहित कार्रवाई की मांग की है। वकीलों ने पुलिस अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों की भी जांच कराने की मांग की है।
विवाद के विरोध में दिल्ली की सभी जिला अदालतों में वकीलों ने मंगलवार को हड़ताल का आह्वान किया है। दोनों पक्षों की शिकायतों और आरोपों के बीच पुलिस मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, शिकायतों और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।




