दिल्ली पुलिस मुख्यालय पर प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले एसीपी मनस्वी वशिष्ठ हुए निलंबित
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बार प्रदर्शनकारी सिपाहियों का नेतृत्व करने वाले एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को सस्पेंड कर दिया गया है। अधिकारियों ने उनके आचरण को गलत मानते हुए यह एक्शन लिया है।

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर पुलिसकर्मियों के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों ने उनके आचरण को अनुचित मानते हुए यह कार्रवाई की है। शाहदरा थाने में पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच हुई झड़प के बाद शुरू हुआ विवाद अब पुलिस विभाग के भीतर भी गहरा गया है। इस घटनाक्रम ने राजधानी के पुलिस महकमे में हलचल बढ़ा दी है।
जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह महिला पुलिसकर्मियों सहित करीब 100 पुलिसकर्मी दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर एकत्र हुए थे। हाथों में तख्तियां और पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों ने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी अरुण कुमार को उनके पुराने पदों पर बहाल करने की मांग उठाई थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि वकीलों के साथ विवाद के बाद दोनों अधिकारियों का तबादला दबाव में किया गया, जिससे पुलिसकर्मियों के मनोबल पर असर पड़ा है।
यह विवाद 23 अक्टूबर को शाहदरा थाने में पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच हुई हाथापाई के बाद शुरू हुआ था। इस घटना में वकील ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट लग गई थी। इसके बाद थाने में दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया और जिला अदालत के वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी। वकीलों की हड़ताल के बीच पुलिस विभाग ने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और तत्कालीन थाना प्रभारी अरुण कुमार का तबादला कर दिया था। इसके बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली थी।
दिल्ली पुलिस ने 28 अक्टूबर को गांधी नगर में उपमंडल पुलिस अधिकारी के पद पर तैनात एसीपी मनस्वी वशिष्ठ का तबादला महिलाओं एवं बच्चों के लिए विशेष पुलिस इकाई में कर दिया था। वहीं, शाहदरा थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी अरुण कुमार को सुरक्षा इकाई में भेज दिया गया था। इन तबादलों के विरोध में पुलिसकर्मियों ने मुख्यालय के बाहर एकजुट होकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
प्रदर्शन को लेकर एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने इसे पुलिसकर्मियों का ‘स्वाभाविक आह्वान’ बताया था। उन्होंने कहा था कि पुलिसकर्मियों को थानों के भीतर सुरक्षा संबंधी समस्याओं और दुर्व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार है। उनका कहना था कि यदि थाने ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी मुश्किल होगा। उन्होंने भरोसा जताया था कि वरिष्ठ अधिकारी उनकी बात सुनेंगे और बातचीत के जरिए मामले का समाधान निकलेगा।
हालांकि, अब प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले एसीपी को ही निलंबित किए जाने से मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस विभाग की इस कार्रवाई के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि विभागीय अनुशासन और पुलिसकर्मियों की शिकायतों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा। फिलहाल शाहदरा थाने की घटना और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम पर पुलिस महकमे की आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।




